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Raksha Bandhan 2025: रक्षाबंधन पर भाई क्यों नहीं जाते बहन के घर? जानिए इसके पीछे की खास वजह

Fri, 08 Aug 2025 04:28 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Raksha Bandhan 2025: इस साल रक्षाबंधन का पावन त्योहार 9 अगस्त को मनाया जाएगा। धार्मिक दृष्टिकोण से राखी का महत्व तभी पूर्ण होता है जब बहन अपने हाथों से भाई की कलाई पर राखी बांधे और उसे तिलक कर आशीर्वाद दे। इसलिए पारंपरिक रूप से यह माना जाता है कि रक्षाबंधन पर भाई को बहन के घर जाने से बचना चाहिए।
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रक्षाबंधन रीति-रिवाज और मान्यताएं - फोटो : Amar Ujala
Raksha Bandhan Mythological Reasons: इस साल रक्षाबंधन का पावन त्योहार 9 अगस्त को मनाया जाएगा। यह पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक होता है, जिसमें बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती है, वहीं भाई जीवनभर उसकी रक्षा का वचन देता है। हिंदू धर्म में रक्षाबंधन को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं और परंपराएं जुड़ी हुई हैं, जैसे सही मुहूर्त में राखी बांधना, भद्राकाल में राखी न बांधने की मनाही, और यह परंपरा कि बहन खुद भाई के घर जाकर राखी बांधे।
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हालांकि, समय और परिस्थिति के अनुसार कई बार बहनें अपने मायके नहीं आ पातीं, ऐसे में कुछ परिवारों में भाई खुद बहन के घर जाकर राखी बंधवाते हैं। लेकिन शास्त्रों के अनुसार इसे उचित नहीं माना जाता। धार्मिक दृष्टिकोण से राखी का महत्व तभी पूर्ण होता है जब बहन अपने हाथों से भाई की कलाई पर राखी बांधे और उसे तिलक कर आशीर्वाद दे। इसलिए पारंपरिक रूप से यह माना जाता है कि रक्षाबंधन पर भाई को बहन के घर जाने से बचना चाहिए।
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Raksha Bandhan - फोटो : Adobe stock
रक्षाबंधन से जुड़ी पौराणिक कथा
रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के प्रेम और सुरक्षा के वचन का प्रतीक है। यह केवल एक पारिवारिक उत्सव नहीं, बल्कि इसकी जड़ें प्राचीन पौराणिक कथाओं में भी गहराई से जुड़ी हुई हैं। ऐसी ही एक महत्वपूर्ण कथा दानवों के पराक्रमी राजा बली और भगवान विष्णु से संबंधित है, जो रक्षाबंधन के आध्यात्मिक महत्व को उजागर करती है।
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कठोर तप करके भगवान विष्णु को प्रसन्न कर लिया। - फोटो : Adobe Stock
दानवराज बली ने मांगा अमरत्व का वरदान
पुराणों के अनुसार, दानवों के राजा बली एक महान भक्त और तपस्वी थे। उन्होंने कठोर तप करके भगवान विष्णु को प्रसन्न कर लिया। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने बली को अमरत्व और तीनों लोकों पर अधिकार का वरदान दे दिया। इस शक्ति से दानवों की स्थिति मजबूत हो गई और देवताओं को चिंता सताने लगी कि राजा बली इतनी शक्ति का दुरुपयोग कर सकता है।

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भगवान विष्णु ने धरती पर वामन रूप में अवतार लिया। - फोटो : freepik
देवताओं की चिंता और भगवान विष्णु का वामन अवतार
देवताओं ने भगवान विष्णु से सहायता की प्रार्थना की। तब भगवान विष्णु ने धरती पर वामन रूप में अवतार लिया। वे एक छोटे ब्राह्मण बालक के रूप में राजा बली के यज्ञ में पहुंचे और उससे तीन पग भूमि दान में मांगी। बली, जो अपने दान के लिए प्रसिद्ध था, बिना संकोच यह भिक्षा देने के लिए तैयार हो गया।
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उन्होंने पहले पग में स्वर्ग लोक, दूसरे पग में पृथ्वी लोक को नाप लिया। - फोटो : Adobe Stock
तीन पग में नाप लिए तीनों लोक
जैसे ही बली ने वामन की मांग को स्वीकार किया, भगवान विष्णु ने अपना विराट रूप धारण कर लिया। उन्होंने पहले पग में स्वर्ग लोक, दूसरे पग में पृथ्वी लोक को नाप लिया। तीसरे पग के लिए कोई स्थान न बचने पर, राजा बली ने समझ लिया कि यह कोई साधारण ब्राह्मण नहीं, बल्कि स्वयं भगवान विष्णु हैं। उसने श्रद्धा भाव से अपना सिर उनके सामने झुका दिया, ताकि भगवान तीसरा पग वहाँ रख सकें।
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राजा बली की भक्ति, विनम्रता और समर्पण देखकर भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न हुए। - फोटो : amarujala
राजा बली को मिला पाताल लोक का राज्य
राजा बली की भक्ति, विनम्रता और समर्पण देखकर भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने राजा बली को पाताल लोक का स्वामी बना दिया और वचन दिया कि वे स्वयं पाताल लोक में रहकर उसकी रक्षा करेंगे। भगवान विष्णु का यह वचन ही रक्षाबंधन के मूल भाव को दर्शाता है।
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रक्षा बंधन - फोटो : Freepik
रक्षा के इस वचन से जुड़ा है रक्षाबंधन
यह कथा बताती है कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक आध्यात्मिक और धार्मिक वचन का भी प्रतीक है। जैसे भगवान विष्णु ने बली को रक्षा का वचन दिया, वैसे ही रक्षाबंधन के दिन भाई अपनी बहन को जीवनभर उसकी रक्षा करने का संकल्प देता है। यह त्योहार प्रेम, समर्पण और विश्वास की अद्भुत मिसाल है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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