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Putrada Ekadashi 2025: कब रखा जाएगा पुत्रदा एकादशी का व्रत? जानें सही तारीख और व्रत का महत्व

Thu, 02 Jan 2025 05:27 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजला, नई दिल्ली

सार

Putrada Ekadashi 2025: पौष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पौष पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। यह एकादशी 21 जनवरी 2025 को है। एकादशी का व्रत करने से सभी विपत्तियां दूर हो जाती हैं, श्रीहरि की कृपा से सभी दोष दूर हो जाते हैं और मृत्यु के बाद मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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पौष पुत्रदा एकादशी - फोटो : amar ujala
Paush Putrada Ekadashi 2025 Shubh Muhurat: पौष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पौष पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। यह एकादशी 21 जनवरी 2025 को है। एकादशी का व्रत करने से सभी विपत्तियां दूर हो जाती हैं, श्रीहरि की कृपा से सभी दोष दूर हो जाते हैं और मृत्यु के बाद मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान सुख के लिए विशेष माना जाता है। इस व्रत को करने से भगवान विष्णु आपके घर को खुशियों से भर देते हैं। यह व्रत आने वाले रविवार को करना है। माना जाता है कि इस व्रत में भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। पौष पुत्रदा एकादशी का शुभ समय और शुभ योग इस प्रकार हैं।

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पौष पुत्रदा एकादशी - फोटो : adobe stock
पौष पुत्रदा एकादशी का शुभ समय
पौष पुत्रदा एकादशी 20 जनवरी को शाम 6:26 बजे शुरू होगी और इसका समापन 21 जनवरी को शाम 7:26 बजे होगा। उदया तिथि के अनुसार व्रत  21 जनवरी को रखा जाएगा और व्रत का पारण 22 जनवरी को सुबह 7:14 बजे से 9:21 बजे तक करना चाहिए। 
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पौष पुत्रदा एकादशी - फोटो : adobe stock
पौष पुत्रदा एकादशी पर यह विशेष योग है
इस वर्ष पौष मास की पुत्रदा एकादशी अत्यंत शुभ है। इस दिन पूरे दिन ब्रह्म योग का शुभ योग बना है। शास्त्रों में इस शुभ योग में दान करने का विशेष महत्व बताया गया है। इस शुभ योग में व्रत करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
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पौष पुत्रदा एकादशी - फोटो : adobe stock
पौष पुत्रदा एकादशी का महत्व
पुत्रदा एकादशी को पुत्र प्राप्ति की एकादशी कहा जाता है। माना जाता है कि पुत्रदा एकादशी के दिन भगवान श्री विष्णु की विधिवत पूजा करने और व्रत करने से व्यक्ति को संतान सुख की प्राप्ति होती है। पुत्रदा एकादशी साल में दो बार आती है। इनमें से पहला पौष माह में और दूसरा श्रावण माह में आता है। जो भक्त इस व्रत को पूरी श्रद्धा से करते हैं उन्हें भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है और उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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