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Pradosh Vrat July 2021: बुध प्रदोष व्रत आज, इस विधि से करें भगवान शिव को प्रसन्न, मनोकामना होगी पूरी

Wed, 07 Jul 2021 11:56 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बुध प्रदोष व्रत 2021 - फोटो : अमर उजाला
Pradosh Vrat July 2021: आषाढ़ माह का पहला प्रदोष व्रत आज 7 जुलाई को है। यह ब्रत बुधवार को पड़ा है इसलिए इसे बुध प्रदोष व्रत कहा जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, प्रदोष व्रत हर माह में दो बार त्रयोदशी (कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में) तिथि के दिन रखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विधान है। प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल यानी संध्या के समय की जाती है। यह व्रत फलाहार या निर्जल रहकर किया जाता है। प्रदोष व्रत भगवान शिव के साथ चंद्रदेव से भी जुड़ा है। मान्यता है कि प्रदोष का व्रत सबसे पहले चंद्रदेव ने ही किया था। माना जाता है शाप के कारण चंद्र देव को क्षय रोग हो गया था। तब उन्होंने हर माह में आने वाली त्रयोदशी तिथि पर भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत रखना आरंभ किया था। जिसके शुभ प्रभाव से चंद्रदेव को क्षय रोग से मुक्ति मिली थी।
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pradosh vrat
सोम प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त- तड़के 03:41 बजे से 04:22 बजे तक।
विजय मुहूर्त-  दोपहर 02:09 बजे से 03:04 बजे तक।
गोधूलि मुहूर्त- शाम 06:28 बजे से 06:52 बजे तक।
अमृत काल- दोपहर 02:43 बजे से 04:31 बजे तक।    
निशिता मुहूर्त- रात्रि 11:32 बजे से 12:14 (जुलाई 08) बजे तक।
सर्वार्थ सिद्धि योग- पूरे दिन
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प्रदोष व्रत की विधि - फोटो : Pixabay
प्रदोष व्रत पूजा विधि
प्रदोष व्रत करने के लिए त्रयोदशी के दिन जल्दी सुबह उठकर सबसे पहले स्नान करें। भगवान शिव को जल चढ़ाकर भगवान शिव का मंत्र जपें। इसके बाद पूरे दिन निराहार रहते हुए प्रदोषकाल में भगवान शिव को शमी, बेल पत्र, कनेर, धतूरा, चावल, फूल, धूप, दीप, फल, पान, सुपारी आदि चढ़ाएं।

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प्रदोष व्रत - फोटो : Social media
भगवान शिव के मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥ 
ॐ नमः शिवाय। ॐ आशुतोषाय नमः।
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प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व - फोटो : अमर उजाला।
प्रदोष व्रत का महत्व
पौराणिक मान्यता के अनुसार प्रदोष व्रत करने वाले पर सदैव भगवान शिव की कृपा बनी रहती है और उसके जीवन से दु:ख दरिद्रता दूर होती है। साथ ही व्रत रखने वाले को कर्ज से मुक्ति मिलती है। प्रदोष व्रत में शिव संग शक्ति यानी माता पार्वती की पूजा की जाती है, जो साधक के जीवन में आने वाली सभी बाधाओं को दूर करते हुए उसका कल्याण करती हैं।
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