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Pradosh Vrat 2026: कब रखा जाएगा जनवरी का आखिरी प्रदोष व्रत? जानें पूजा विधि और मुहूर्त

Tue, 27 Jan 2026 07:39 AM IST
ज्योति मेहरा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

Pradosh Vrat 2026: आइए जानते हैं कि जनवरी महीने के अंत में प्रदोष व्रत कब पड़ेगा, उसका शुभ मुहूर्त क्या है और पूजा विधि कैसी होनी चाहिए।
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जनवरी प्रदोष व्रत 2026 - फोटो : Amar Ujala
Pradosh Vrat January 2026 Date: सनातन धर्म में भगवान शिव को सत्य, सौंदर्य और करुणा का प्रतीक माना गया है। मान्यता है कि भोलेनाथ बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं और अपने भक्तों पर असीम कृपा बरसाते हैं। जल, बेलपत्र और सच्ची श्रद्धा मात्र से वे शीघ्र फल प्रदान करते हैं। शिव की उपासना और व्रतों में प्रदोष व्रत को विशेष महत्व प्राप्त है। यह व्रत प्रत्येक हिंदी महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। इस दिन भगवान शिव के साथ माता पार्वती की पूजा करने से साधक को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि जनवरी महीने के अंत में प्रदोष व्रत कब पड़ेगा, उसका शुभ मुहूर्त क्या है और पूजा विधि कैसी होनी चाहिए।

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प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त - फोटो : adobe stock
प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त
  • पंचांग के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 30 जनवरी 2026 को प्रातः 11:09 बजे से प्रारंभ होगी और अगले दिन 31 जनवरी 2026 को सुबह 08:25 बजे तक रहेगी। 
  • इस कारण प्रदोष व्रत और उसकी पूजा 30 जनवरी 2026 को करना ही उत्तम माना गया है। 
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प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त - फोटो : adobe stock
  • यह व्रत शुक्रवार के दिन पड़ रहा है, इसलिए इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाएगा। 
  • इस दिन प्रदोष काल सायंकाल 05:59 बजे से शुरू होकर रात्रि 08:37 बजे तक रहेगा। 
  • इस प्रकार शिव भक्तों को महादेव की आराधना के लिए लगभग ढाई घंटे का शुभ समय प्राप्त होगा।

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प्रदोष व्रत की पूजा विधि - फोटो : adobe stock
प्रदोष व्रत की पूजा विधि
हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान आदि के बाद पूजा करने के साथ-साथ प्रदोष काल में विशेष रूप से भगवान शिव की आराधना करने का विधान है। 
  • पूजा प्रारंभ करने से पहले सभी पूजन सामग्री एकत्र कर लें और शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से पूजा शुरू करें। 
  • सबसे पहले शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करें, क्योंकि यह भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। 
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प्रदोष व्रत की पूजा विधि - फोटो : adobe stock
  • इसके बाद धूप, दीप, फल, फूल, भस्म, बेलपत्र और धतूरा चढ़ाएं। 
  • प्रदोष व्रत की कथा का पाठ करें और अंत में भगवान शिव की आरती करें। 
  • पूजा संपन्न होने के बाद प्रसाद सभी में बांटें और स्वयं भी ग्रहण करें।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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