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Pradosh Vrat 2025: मार्च माह का अंतिम प्रदोष व्रत आज, यहां पढ़ें पूजा मुहूर्त विधि और नियम

Thu, 27 Mar 2025 07:01 AM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Kab Hai Pradosh Vrat: हर महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है, जिसे खास धार्मिक महत्व प्राप्त है। माना जाता है कि इस व्रत को श्रद्धा और मनोभाव से किया जाए तो भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
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गुरु प्रदोष व्रत - फोटो : adobe stock
Guru Pradosh Vrat 2025 Date: आज प्रदोष व्रत रखा जा रहा है।  पंचांग के अनुसार, हर महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है, जिसे खास धार्मिक महत्व प्राप्त है। माना जाता है कि इस व्रत को श्रद्धा और मनोभाव से किया जाए तो भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इससे न केवल घर-परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है, बल्कि भक्तों को आरोग्य का वरदान भी मिलता है। महादेव की कृपा से जीवन में आ रही परेशानियों और कष्टों से भी मुक्ति मिलती है।

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इस व्रत में विशेष रूप से भगवान शिव का पूजन, शिवलिंग का अभिषेक, बेलपत्र, आक के फूल चढ़ाना और शिव मंत्रों का जाप करना आवश्यक होता है। प्रदोष व्रत के दिन पूजा का समय प्रदोष काल में होता है।

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आइए जानते हैं, इस माह का आखिरी प्रदोष व्रत कब होगा, पूजा का शुभ मुहूर्त क्या होगा, और इस व्रत को करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
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गुरु प्रदोष व्रत - फोटो : adobe stock
प्रदोष व्रत तिथि
चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 26 मार्च 2025, देर रात 1 बजकर 42 मिनट पर
चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि समाप्त: 27 मार्च 2025, रात 11 बजकर 3 मिनट पर
प्रदोष व्रत की पूजा विशेष रूप से प्रदोष काल  में की जाती है, जो सूर्यास्त के बाद का समय होता है। इस दिन पड़ने के कारण इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाएगा।
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गुरु प्रदोष व्रत - फोटो : adobe stock
प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त
प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त:  27 मार्च 2025,  सायं 6 बजकर 35 मिनट से  रात्रि  8 बजकर 57 मिनट तक रहेगा।
इस अवधि में पूजा करना अत्यधिक शुभ और फलदायी माना जाता है। इस समय में भगवान शिव का ध्यान और पूजा विशेष रूप से प्रभावशाली होती है।

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गुरु प्रदोष व्रत - फोटो : adobe stock
प्रदोष व्रत पूजा विधि
  • सबसे पहले, सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान शिव का ध्यान करते हुए प्रदोष व्रत का संकल्प लें।
  • पूजा स्थल पर शिवलिंग स्थापित करें और उस पर जल, बेलपत्र, आक के फूल, गुड़हल के फूल और मदार के फूल चढ़ाएं।
  • पूजा के दौरान ॐ नमः शिवाय और ॐ त्र्यम्बकं यजामहे जैसे शिव मंत्रों का जाप करें।
  • पूजा के बाद, प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें या सुनें।
  • पूजा के अंत में भगवान शिव की आरती करें और उनका प्रिय भोग अर्पित करें।
  • पूरे शिव परिवार की पूजा करें, जिसमें भगवान शिव के साथ-साथ माता पार्वती, गणेश जी और कार्तिकेय जी की पूजा भी शामिल हो।
  • प्रदोष व्रत के अगले दिन व्रत का पारण करें।
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गुरु प्रदोष व्रत - फोटो : freepik
प्रदोष व्रत पर ध्यान रखें ये बातें
  • प्रदोष व्रत के दिन तामसिक भोजन, मांसाहार और मादक पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • व्रत रखने वाले भक्तों को दिनभर भगवान महादेव का ध्यान और स्मरण करना चाहिए।
  • किसी के प्रति गुस्सा या द्वेष की भावना नहीं रखनी चाहिए और नकारात्मक सोच को मन से दूर रखना चाहिए।
  • व्रत के दौरान झूठ बोलने से बचना चाहिए और किसी का अपमान या अनादर करने से परहेज करना चाहिए।
  • पूरी श्रद्धा और भक्ति से व्रत करें, ताकि महादेव की कृपा प्राप्त हो सके।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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