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Parshuram Jayanti 2026: कब मनाई जाएगी परशुराम जयंती? जानें कौन कर सकता है इनकी पूजा

Tue, 31 Mar 2026 12:54 PM IST
Jyoti Mehra ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

Parshuram Jayanti 2026: भगवान परशुराम को विष्णु का छठा अवतार माना जाता है। इनका जन्म अक्षय तृतीया के दिन हुआ था, इसलिए हर साल इसी तिथि पर उनकी जयंती मनाने की परंपरा है। आइए जानते हैं इससे जुड़े शुभ मुहूर्त और पूजन से जुड़ी खास बातें।
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परशुराम जंयती 2026 पूजा विधि और नियम - फोटो : Amar Ujala
Parshuram Jayanti 2026 Date: भगवान विष्णु के उग्र अवतार माने जाने वाले भगवान परशुराम का जन्म अक्षय तृतीया के दिन हुआ था, इसलिए हर साल इसी तिथि पर उनकी जयंती मनाने की परंपरा है। मान्यता है कि भगवान विष्णु ने अधर्म और दुष्ट शक्तियों के विनाश के लिए परशुराम रूप धारण किया था।

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भगवान परशुराम को विष्णु का छठा अवतार माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार उन्होंने अत्याचारी क्षत्रियों का नाश किया था। उनकी आराधना से शक्ति, साहस और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। पुराणों में यह उल्लेख मिलता है कि सामान्य व्यक्ति के लिए परशुराम जी की प्रत्यक्ष पूजा करना उचित नहीं माना जाता। ऐसे में इस दिन ऐसे उपाय करने चाहिए, जिनसे भगवान विष्णु प्रसन्न हों। आइए जानते हैं इससे जुड़े शुभ मुहूर्त और पूजन से जुड़ी खास बातें।
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परशुराम जयंती 2026 मुहूर्त - फोटो : adobe stock
परशुराम जयंती 2026 मुहूर्त
वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि आरंभ - 19 अप्रैल 2026, सुबह 10:49
वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि समाप्त - 20 अप्रैल 2026, सुबह 07:27
ऐसे में परशुराम जयंती 19 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी। 

पूजा का शुभ समय - सुबह 7:29 से दोपहर 12:20 तक
शाम का पूजन समय - सुबह 6:49 से सुबह 10:57 तक
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क्यों नहीं की जाती भगवान परशुराम की प्रत्यक्ष पूजा? - फोटो : adobe stock
क्यों नहीं की जाती भगवान परशुराम की प्रत्यक्ष पूजा?
भगवान परशुराम सप्त चिरंजीवियों में से एक माने जाते हैं और उनका स्वरूप अत्यंत तेजस्वी एवं उग्र बताया गया है। मान्यता है कि उनकी उपासना से प्रबल ऊर्जा प्राप्त होती है, जिसे सामान्य व्यक्ति के लिए संतुलित करना आसान नहीं होता। यही कारण है कि उनकी नियमित पूजा कम ही की जाती है।

कौन कर सकता है परशुराम जी की उपासना?
जो लोग साहस और जोखिम से जुड़े कार्यों में लगे होते हैं, जैसे सुरक्षा बल या विद्यार्थी, उनके लिए परशुराम जी की साधना लाभकारी मानी जाती है। इससे आत्मबल, निर्भीकता और मानसिक दृढ़ता में वृद्धि होती है। साथ ही आध्यात्मिक उन्नति के संकेत भी मिलते हैं।

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परशुराम जयंती पर पूजा विधि - फोटो : adobe stock
परशुराम जयंती पर पूजा विधि
  • इस दिन सुबह स्नान के बाद भगवान परशुराम की प्रतिमा की पूजा करने के बजाय मानसिक रूप से उनका ध्यान करें।
  • साथ ही भगवान विष्णु की आराधना करें। 
  • पूजा में पीले फूल, चंदन, तुलसी दल, धूप-दीप और मिठाई अर्पित करें।
  • ‘ॐ राम राम ॐ राम राम परशु हस्ताय नमः’ मंत्र का श्रद्धा से जप करें।
  • अपनी क्षमता अनुसार दान करें, जैसे मटका, अन्न या खरबूजा दान करना शुभ माना जाता है।
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परशुराम जी की उपासना के लाभ - फोटो : adobe stock
परशुराम जी की उपासना के लाभ
  • साहस और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
  • अन्याय के खिलाफ खड़े होने की शक्ति मिलती है।
  • शत्रुओं पर विजय पाने की क्षमता बढ़ती है।
  • करियर की चुनौतियों को पार करने में मदद मिलती है।
  • जीवन में संयम और स्पष्ट सोच विकसित होती है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता और संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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