निर्जला एकादशी के प्रमुख नियम
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निर्जला एकादशी के प्रमुख नियम
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत का पूर्ण फल तभी मिलता है जब इसे बिना जल ग्रहण किए रखा जाए। कथा के अनुसार महाभारत काल में भीमसेन ने भी इसी प्रकार निर्जल रहकर यह व्रत किया था, जिससे उन्हें सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त हुआ। नियमों के मुताबिक, एकादशी तिथि के सूर्योदय से लेकर द्वादशी तिथि के सूर्योदय तक व्रती न तो अन्न ग्रहण करता है और न ही पानी पीता है। इस दौरान भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना और भक्ति करना विशेष फलदायी माना गया है।