Nirjala Ekadashi 2025
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निर्जला एकादशी पारण का महत्व
निर्जला एकादशी का पारण वर्ष 2025 में अगले दिन, यानी द्वादशी तिथि को किया जाएगा। पारण व्रत का सबसे महत्वपूर्ण और अंतिम चरण होता है, जिसका अर्थ है उपवास का विधिपूर्वक समापन। एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में सही समय, शुभता और श्रद्धा के साथ किया जाना आवश्यक है, तभी व्रत का पूरा फल मिलता है।
शास्त्रों के अनुसार, यदि पारण समय पर द्वादशी तिथि में नहीं किया जाता है तो व्रत अधूरा और निष्फल माना जाता है। भगवान विष्णु स्वयं कहते हैं कि द्वादशी को समय पर पारण न करने से व्रत का पुण्य खत्म हो जाता है। पारण करने से व्रती को व्रत का पूर्ण फल, पुण्य और ईश्वरीय आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसलिए, पारण को बड़ी श्रद्धा और नियमबद्ध तरीके से करना चाहिए।