मां चंद्रघंटा का स्वरूप
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मां चंद्रघंटा का स्वरूप और धार्मिक महत्व
मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप का नाम उनके मस्तक पर सुशोभित अर्धचंद्र के कारण पड़ा है। उनके माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र विराजमान रहता है, इसलिए उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। देवी का वाहन सिंह माना जाता है, जो उनकी शक्ति, पराक्रम और निर्भयता को दर्शाता है। उनके दस हाथों में विभिन्न अस्त्र-शस्त्र और पूजन सामग्री सुशोभित हैं। इनमें त्रिशूल, तलवार, गदा, धनुष-बाण, कमल और कमंडल जैसे प्रतीक शामिल हैं। उनका दिव्य स्वरूप अधर्म के विरुद्ध संघर्ष और धर्म की स्थापना का संदेश देता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां चंद्रघंटा की उपासना से मन का भय दूर करने, साहस बढ़ाने और मानसिक शांति प्राप्त करने की प्रेरणा मिलती है।