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नवरात्रि के नौ दिनों में इन रंगों के परिधान पहन कर करें पूजा, बरसेगी मां की कृपा

Tue, 13 Oct 2020 07:41 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन, वास्तुविद
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navratri 2020: पूजा-पाठ कलश स्थापना, मां दुर्गा के श्रृंगार के अलावा इन नौ दिनों में आप अलग-अलग देवियों के रूप के अनुरूप वस्त्र पहनकर पूजा के फल में वृद्धि कर सकते हैं - फोटो : अमर उजाला
17 अक्तूबर से शारदीय नवरात्रि प्रारंभ हो रहे हैं। धर्मशास्त्रों के अनुसार नवरात्रि माता भगवती की आराधना के लिए श्रेष्ठ समय होता है। नवरात्रि के इन नौ दिनों में देवी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा होती है और हर देवी स्वरुप की कृपा से अलग-अलग तरह के मनोरथ पूर्ण होते हैं, जिससे जातक के जीवन में सुख-समृद्धि आती है। पूजा-पाठ कलश स्थापना, मां दुर्गा के श्रृंगार के अलावा इन नौ दिनों में आप अलग-अलग देवियों के रूप के अनुरूप वस्त्र पहनकर पूजा के फल में वृद्धि कर सकते हैं। ध्यान रहे देवी की पूजा में गंदे और फटे हुए वस्त्र भूलकर भी न पहनें।

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शैलपुत्री
प्रथम मां शैलपुत्री-
नवरात्रि का पहला यानि प्रतिपदा का दिन पर्वतराज हिमालय की पुत्री माँ शैलपुत्री को समर्पित है। इस दिन कलश पूजन के साथ मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री का पूजन किया जाता है। इस दिन अनंत शक्तियों वाली माँ की पूजा करते समय उपासक को लाल, गुलाबी, नारंगी एवं रानी रंग के कपड़े पहनकर पूजा करने से पूजा के लाभ के साथ माता की कृपा प्राप्त होती है।
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Wallpapers Navratri 2020 - फोटो : Amar Ujala
द्वितीय देवी ब्रह्मचारिणी-
मां दुर्गा की नवशक्तियों का दूसरा स्वरुप देवी ब्रह्मचारिणी का है। नवरात्रि के दूसरे दिन स्वरुप से पूर्ण ज्योतिर्मय और भव्य माता ब्रह्मचारिणी की उपासना करते समय सफ़ेद, क्रीम या पीले रंग के कपड़े पहनना अति शुभ माना गया है इससे साधक की मेधा शक्ति विकसित होती है एवं समस्त मनोरथ पूर्ण होते हैं।

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देवी चंद्रघंटा
तृतीय मां चंद्रघंटा-
बाघ पर सवार दुर्गाजी चंद्रघंटा के शरीर का रंग स्वर्ण के समान चमकीला है। नवरात्रि के तीसरे दिन दस भुजाओं वाली मां शक्ति के तीसरे रूप चंद्रघंटा का पूजन किया जाता है। इस दिन पीला, लाल,दूधियां या केसरिया रंग के कपड़े पहनकर देवी की पूजा करने से आपके बिगड़े हुए काम बनने लगते हैं,मां प्रसन्न होकर अपने साधकों को चिरायु,आरोग्य और सुखी होने का आशीर्वाद देती हैं।
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कूष्मांडा
चतुर्थ देवी कूष्मांडा
इस दिन दुर्गा मां के चौथे रूप कूष्मांडा की आराधना की जाती है। शेर पर सवार मां कूष्माण्डा देवी ने ही ब्रह्मांड की रचना की थी,इन्हीं के तेज और प्रकाश से दसों दिशाएं प्रकाशित हो रही हैं। देवी कूष्मांडा प्रकृति की भी देवी हैं इसलिए इनकी पूजा में क्रीम,पीला, हरा और भूरे रंग के वस्त्र पहनने से पूजा के फल में अतिशय वृद्धि होगी।
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स्कंदमाता
पंचम देवी स्कंदमाता
भगवान कार्तिकेय(स्कन्द)की माता होने के कारण देवी के इस पांचवें स्वरुप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है।नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना सफेद, दूधियां,लाल या हरे रंग के वस्त्र पहनकर करने पर साधक की सभी इच्छाएं पूरी होती है उसे संतान सुख,आरोग्य तथा ज्ञान की प्राप्ति होती है।  
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कात्यायनी देवी
षष्टम मां कात्यायनी-
दुर्गा मां का छठा रूप माता कात्यायनी है। देवी कात्यायनी को महिषासुर मर्दिनी भी कहा जाता है,मां कात्यायनी अमोघ फलदायिनी हैं। इनकी आराधना से गृहस्त जीवन सुखमय होता है। भक्तों को इस दिन लाल, मेहरून, नारंगी, गुलाबी, गेरुआ एवं मूंगा रंग के कपड़े पहनकर माता रानी की पूजा अर्चना करने से और अधिक लाभ मिलता है।

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कालरात्रि देवी
सप्तम देवी कालरात्रि
दुर्गा पूजा के सातवें दिन तमाम आसुरिक शक्तियों का विनाश करने वाली देवी मां कालरात्रि की पूजा का विधान है। नवरात्रि की पूजा में तंत्र साधना करने वाले लोग इस दिन काले रंग का वस्त्र धारण करते हैं। इनकी पूजा में बैंगनी, स्लेटी, नीला एवं आसमानी रंग के वस्त्र धारण  करने से मां प्रसन्न होकर अपने भक्तों के सभी क्लेशों को दूर कर उन्हें सुख-शांति प्रदान करती हैं।

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मां महागौरी - फोटो : अमर उजाला
अष्टम दुर्गा महागौरी
मां का आठवां स्वरूप यानी देवी महागौरी सर्वसौभाग्यदायिनी मानी जाती हैं एवं इनका स्वरुप अत्यंत उज्जवल और श्वेत वस्त्र धारण किए हुए है। ये धन,वैभव और सुख-शांति की अधिष्ठात्री देवी हैं। इनकी पूजा के दौरान भक्तों को केसरिया, संतरी या लाल रंग या गुलाबी रंग के वस्त्र धारण करना विशेष लाभ प्रदान करता है।
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मां सिद्धिदात्री - फोटो : अमर उजाला
नवम मां सिद्धिदात्री
नवीं शक्ति सभी सिद्दियों को देने वाली हैं। इस दिन विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले साधकों को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है। इनकी पूजा-उपासना करते समय साधक यदि  लाल, गुलाबी, क्रीम, नारंगी रंग के वस्त्र पहने तो पूजा के फल में वृद्धि होती है एवं भक्त को यश,बल,कीर्ति की प्राप्ति होती है।
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