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Navratri Parana 2025: कब करें नवरात्रि व्रत का पारण? जानें पारण का शुभ समय और जरूरी नियम

Wed, 01 Oct 2025 06:01 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Shardiya Navratri 2025 Vrat Parana Vidhi: शारदीय नवरात्रि 2025 के व्रत पारण को लेकर तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। कुछ परंपराओं में नवमी को हवन के बाद पारण किया जाता है, जबकि कई श्रद्धालु दशमी पर देवी विसर्जन के साथ व्रत समाप्त करते हैं। ऐसे में पारण की सही तिथि, विधि और सावधानियों को समझना आवश्यक है ताकि व्रत का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।
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नवरात्रि व्रत का पारण - फोटो : Amar Ujala
Shardiya Navratri 2025 Vrat Parana Muhurat: शारदीय नवरात्रि 2025 इस बार विशेष संयोगों के साथ 22 सितंबर से आरंभ होकर 2 अक्टूबर को विजयादशमी (दशहरा) के दिन संपन्न हो रही है। नवरात्रि का व्रत रखने वाले श्रद्धालु नवमी और दशमी के दिन व्रत का पारण (समापन) करते हैं, लेकिन इस बार पारण की सही तिथि को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति है। कुछ लोग महानवमी के दिन हवन के बाद व्रत तोड़ते हैं, जबकि कई श्रद्धालु दशमी को देवी प्रतिमा और कलश विसर्जन के बाद पारण करना शुभ मानते हैं।
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ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि 2025 में नवरात्रि व्रत पारण कब करना उचित रहेगा 1 अक्टूबर को या 2 अक्टूबर को? साथ ही पारण करते समय किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए, ताकि व्रत का संपूर्ण पुण्य फल प्राप्त हो सके। आइए जानते हैं पारण की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और इससे जुड़ी आवश्यक सावधानियां।
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पंचांग की गणना के अनुसार, पारण का मुख्य विधान नवमी या दशमी तिथि को ही होता है। - फोटो : अमर उजाला
नवरात्रि पारण की तिथि
नवरात्रि पारण की तिथि को लेकर 2025 में भक्तों के बीच थोड़ा संशय देखा जा रहा है, क्योंकि इस बार महानवमी 1 अक्टूबर को और विजयादशमी (दशहरा) 2 अक्टूबर को पड़ रही है। पंचांग की गणना के अनुसार, पारण का मुख्य विधान नवमी या दशमी तिथि को ही होता है। अधिकांश परंपराओं में व्रत रखने वाले श्रद्धालु महानवमी के दिन हवन के बाद पारण करते हैं, इसलिए 1 अक्टूबर को पारण करना उचित माना गया है। हालांकि कुछ परंपराओं और क्षेत्रों में दशमी तिथि, यानी 2 अक्टूबर को कलश या प्रतिमा विसर्जन के बाद पारण किया जाता है। ऐसे में श्रद्धालु अपनी पारंपरिक मान्यताओं और परिवार की परंपरा के अनुसार पारण कर सकते हैं, लेकिन धार्मिक रूप से दशमी तिथि को पारण करना अधिक प्रचलित और मान्य है।
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कन्याओं को भोजन के बाद दक्षिणा, वस्त्र या उपहार देकर विदा करें। - फोटो : adobe stock
नवरात्रि पारण विधि 
  • प्रातःकाल स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करके पूजा की तैयारी करें।
  • माता दुर्गा की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं और पूजा स्थल को सजाएं।
  • माता को लाल या पीले फूल, फल, नारियल, मिठाई व भोग अर्पित करें।
  • कन्याओं (कुंवारी बालिकाओं) को आमंत्रित करें, उनके चरण धोकर उन्हें आदरपूर्वक भोजन कराएं।
  • कन्याओं को भोजन के बाद दक्षिणा, वस्त्र या उपहार देकर विदा करें।
  • इसके पश्चात हवन करें या दुर्गा सप्तशती का पाठ अथवा देवी मंत्रों का जाप करें।
  • पूजा के अंत में व्रत का विधिपूर्वक पारण करें, अर्थात भोजन या जल ग्रहण करें।
  • अंत में परिवार सहित माता दुर्गा से सुख, शांति और समृद्धि की कामना करें।
 
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कन्या पूजन करते समय साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें, उनके बैठने और भोजन की व्यवस्था पवित्र और स्वच्छ होनी चाहिए। - फोटो : अमर उजाला
नवरात्रि पारण के समय रखें ये  सावधानियां
  • पारण में हमेशा सात्विक आहार का ही सेवन करें ।  तामसिक भोजन, मांसाहार या नशे जैसी चीज़ों से पूरी तरह परहेज रखें।
  • कन्या पूजन करते समय साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें, उनके बैठने और भोजन की व्यवस्था पवित्र और स्वच्छ होनी चाहिए।
  • कन्याओं को प्रसन्न करना पुण्यदायी माना गया है, इसलिए उन्हें ससम्मान भोजन कराएं और यथासंभव उपहार दें।
  • व्रत खोलते समय किसी भी तरह की जल्दबाजी न करें । हर पूजा विधि को श्रद्धा और धैर्य के साथ पूरा करें।
  • पूजा में परिवार के सभी सदस्यों की भागीदारी होनी चाहिए, इससे सामूहिक रूप से शुभ फल और पुण्य की प्राप्ति होती है।
  • पारण के समय शुद्धता, नियम और मन की एकाग्रता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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