हिंदू धर्म के मान्यताओं के अनुसार, नागों की उत्पत्ति समुद्र मंथन के समय हुई थी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब देवता और दानव मिलकर समुद्र मंथन कर रहे थे, तब उसमें से अमृत के साथ-साथ कई विषैले पदार्थ भी निकले थे। इन विषैले पदार्थों को पीने से भगवान शिव का गला नीला पड़ गया था, यही कारण है कि भोलेनाथ को नीलकंठ भी कहा जाता है। आपने देखा होगा कि शिवलिंग पर जल दिया जाता है। भगवान शंकर को जल और दूध चढ़ाने के पीछे भी एक मान्यता है। विष पीने के बाद भगवान शंकर का शरीर बहुत गर्म हो गया था, उसी को ठंडा रखने के लिए उन्हें जल चढ़ाया जाता है। साथ ही सांप एक जानवर है जिसकी तासीर ठंडी होती है, इसलिए विष के प्रभाव को कम करने के लिए सांप को गले में लपेट लिया था।