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Mokshada Ekadashi 2025: मोक्षदा एकादशी पर भद्रा का साया, जानें समय, तिथि और महत्व

Thu, 20 Nov 2025 01:08 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Mokshada Ekadashi 2025: हर साल मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर मोक्षदा एकादशी का व्रत रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति की मनोकामनाएं पूरी और पितरों की कृपा मिलती हैं। 
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Mokshada Ekadashi 2025 - फोटो : अमर उजाला
Mokshada Ekadashi 2025: हर साल मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर मोक्षदा एकादशी का व्रत रखा जाता है। मान्यता है कि, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति की मनोकामनाएं पूरी और पितरों की कृपा मिलती हैं। इस तिथि पर कृष्ण जी ने अर्जुन को गीता का उपदेश भी दिया था। इसलिए मोक्षदा एकादशी पर गीता जयंती भी मनाई जाती हैं। शास्त्रों के मुताबिक, यह तिथि पितरों की कृपा पाने के लिए भी अत्यंत शुभ है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान व पिंडदान जैसे कार्य करने से पूर्वजों को मोक्ष मिलता है। वहीं श्रीहरि को पीली चीजों का भोग लगाने से लंबे समय से अटके काम पूरे और विवाह में आ रही रुकावटें भी दूर होती हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि, भगवान विष्णु को समर्पित यह व्रत कब रखा जाएगा।

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इस वर्ष मोक्षदा एकादशी तिथि का प्रारंभ 30 नवंबर 2025 को रविवार रात 09:29 मिनट पर होगा। - फोटो : Adobe Stock
मोक्षदा एकादशी 2025 
  • इस वर्ष मोक्षदा एकादशी तिथि का प्रारंभ 30 नवंबर 2025 को रविवार रात 09:29 मिनट पर होगा।
  • तिथि का समापन 1 दिसंबर 2025 को शाम 07 बजकर 1 मिनट पर है। 
  • उदया तिथि के मुताबिक, मोक्षदा एकादशी का व्रत 1 दिसंबर 2025 को मान्य होगा।
  • 2 दिसंबर को सुबह 6 बजकर 57 मिनट से सुबह 9 बजकर 3 मिनट तक आप व्रत का पारण कर सकते हैं।

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ज्योतिषियों के मुताबिक, मोक्षदा एकादशी के दिन सुबह 8 बजकर 20 मिनट से शाम 7 बजकर 1 मिनट तक भद्रा है। - फोटो : adobe stock
मोक्षदा एकादशी पर भद्रा का साया
ज्योतिषियों के मुताबिक, मोक्षदा एकादशी के दिन सुबह 8 बजकर 20 मिनट से शाम 7 बजकर 1 मिनट तक भद्रा है। चूंकि इस भद्रा का वास धरती पर होगा, इसलिए आप इस अवधि में पूजा-पाठ से जुड़े कार्य न करें। इसके अलावा इस एकादशी पर पंचक भी बने रहेंगे। इस दिन सुबह 6:56 बजे से रात 11:18 बजे तक पंचक है।

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अब आप मोक्षदा एकादशी के व्रत की का पाठ करें। - फोटो : Adobe Stock
मोक्षदा एकादशी पूजा विधि
  • मोक्षदा एकादशी पर सर्वप्रथम विष्णु जी को साफ वस्त्र पहनाएं और उनका श्रृंगार करें।
  • अब पीले फूलों की माला श्रीहरि को पहनाएं।
  • माता लक्ष्मी को भी नए वस्त्र अर्पित करें।
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विष्णु चालीसा पढ़ें और अंत में आरती करें। - फोटो : Adobe Stock
  • अब प्रभु को रोली से तिलक लगाएं।
  • इसके बाद 'ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात:' मंत्र का जाप करें।
  • फिर आप केले, पंजीरी और पंचामृ का भोग लगाएं।
  • अब आप मोक्षदा एकादशी के व्रत की कथा का पाठ करें।
  • विष्णु चालीसा पढ़ें और अंत में आरती करें।
  • अगले दिन आप व्रत का पारण करें परंतु उससे पहले अपनी क्षमतानुसार कुछ चीजों का दान करें। इससे जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।
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भगवान विष्णु की आरती - फोटो : adobe stock
भगवान विष्णु की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय...॥

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय...॥

तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय...॥

तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय...॥

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय...॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।

अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय...॥

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय...॥

तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय...॥

जगदीश्वरजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय...॥




डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

 

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