फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mohini Ekadashi Vrat Katha: मोहिनी एकादशी पर करें इस कथा का पाठ, मिलेगा संपूर्ण फल

Thu, 08 May 2025 10:50 AM IST
ज्योति मेहरा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति इस व्रत की कथा को श्रद्धा से पढ़ता या सुनता है, उस पर राहु की अशुभ छाया नहीं पड़ती। आइए जानते हैं इस व्रत की प्राचीन कथा।
विज्ञापन
1 of 5
मोहिनी एकादशी की व्रत कथा - फोटो : adobe
Mohini Ekadashi Vrat Katha in Hindi: वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के मोहिनी स्वरूप की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि जैसे भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर देवताओं को राहु के छल से बचाया था, उसी प्रकार वे इस दिन व्रत करने वालों की भी नकारात्मक प्रभावों से रक्षा करते हैं। ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति इस व्रत की कथा को श्रद्धा से पढ़ता या सुनता है, उस पर राहु की अशुभ छाया नहीं पड़ती। आइए जानते हैं इस व्रत की प्राचीन कथा।
 

Mohini Ekadashi 2025: जानिए मोहिनी एकादशी पर विष्णु आरती और चालीसा पाठ करने के लाभ

Mohini Ekadashi 2025: मोहिनी एकादशी पर इस विधि से करें भगवान विष्णु की पूजा, पूरे होंगे सभी अटके काम

Operation Sindoor: जानिए आखिर क्यों दिया पीएम मोदी ने सैन्य अभियान को "ऑपरेशन सिंदूर" नाम

विज्ञापन

2 of 5
मोहिनी एकादशी की व्रत कथा - फोटो : adobe stock
मोहिनी एकादशी की व्रत कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार सरस्वती नदी के तट पर स्थित भद्रावती नामक नगर में चंद्रवंशी राजा द्युतिमान का राज्य था। उसी नगर में एक धर्मनिष्ठ वैश्य धनपाल निवास करता था, जो विष्णु भक्त होने के साथ-साथ दान और सेवा कार्यों में हमेशा अग्रसर रहता था। उसके पांच पुत्र थे, सुमना, सद्बुद्धि, मेधावी, सुकृति और सबसे छोटा पुत्र धृष्टबुद्धि। धृष्टबुद्धि का स्वभाव अत्यंत दुष्ट था; वह जुए, मद्यपान और अनैतिक कार्यों में लिप्त रहता था। धीरे-धीरे उसने पिता की संपत्ति भी नष्ट कर दी।
विज्ञापन

3 of 5
मोहिनी एकादशी की व्रत कथा - फोटो : adobe stock
धनपाल पुत्र की दुष्टता से अत्यधिक दुखी होकर उसे घर से निकाल देता है। घर से बाहर होकर धृष्टबुद्धि और भी अधर्म में लिप्त हो गया। एक बार वह चोरी करते पकड़ा गया, परंतु पिता की प्रतिष्ठा के कारण उसे क्षमा मिल गई। इसके बाद वह वन में भटकता रहा और भूख से विवश होकर पशु हत्या करने लगा।

4 of 5
मोहिनी एकादशी की व्रत कथा - फोटो : adobe stock
एक दिन वह भटकते हुए महर्षि कौण्डिन्य के आश्रम जा पहुंचा। उस समय वैशाख माह चल रहा था और महर्षि स्नान कर लौट रहे थे। धृष्टबुद्धि उनके चरणों में गिर पड़ा और अपने पापों से मुक्ति का उपाय पूछने लगा। उसने विलाप करते हुए कहा, “गुरुदेव, मैंने जीवन में अनेक अधर्म किए हैं। कृपया मुझे ऐसा उपाय बताएं जिससे मैं मोक्ष प्राप्त कर सकूं।”
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
मोहिनी एकादशी की व्रत कथा - फोटो : adobe stock
महर्षि ने उस पर दया की और बताया, “हे वत्स, वैशाख शुक्ल एकादशी को मोहिनी एकादशी कहा जाता है। इस दिन का व्रत करने से बड़े से बड़े पाप भी नष्ट हो जाते हैं। यदि तुम श्रद्धा और नियमपूर्वक यह व्रत करोगे, तो तुम्हारे समस्त पाप समाप्त हो जाएंगे।” धृष्टबुद्धि ने महर्षि के निर्देशों का पालन किया और पूरी श्रद्धा से व्रत रखा। इस व्रत के प्रभाव से उसका जीवन रूपांतरित हो गया। अंत में वह दिव्य स्वरूप प्राप्त कर गरुड़ पर आरूढ़ होकर विष्णुलोक चला गया।

Hanuman Puja Ke Niyam: क्या महिलाएं हनुमान जी की मूर्ति को छू सकती हैं? जानें ये सही है या गलत
Mantra: हर दिन सुबह उठकर करें इन मंत्रों का जाप, बनी रहेगी सुख-समृद्धि


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें