गंगाजल में काले तिल मिलाकर 108 बार महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
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महाशिवरात्रि 2026 जलाभिषेक की विधि
महाशिवरात्रि के दिन शिव पूजा की तैयारी सुबह ही स्नान करके और साफ-सुथरे वस्त्र पहनकर शुरू करें। इसके बाद पूजा की सभी आवश्यक सामग्री जैसे दूध, दही, शहद, घी, शक्कर और गन्ने का रस एकत्रित कर लें।
अब शिवलिंग पर इन वस्तुओं का अभिषेक करें। जलाभिषेक करते समय ध्यान रखें कि जल की धारा पतली और धीरे-धीरे गिरे। कभी भी तेजी से जलाभिषेक न करें, क्योंकि शास्त्रों में इसे उचित नहीं माना गया है। इसके बाद गंगाजल में काले तिल मिलाकर 108 बार महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें और इस जल को शिवलिंग पर अर्पित कर दें।
इसके पश्चात भोलेनाथ को फल और फूल अर्पित करें। महादेव के समक्ष आटे का चौमुखी दीपक जला दें और धूपबत्ती भी प्रज्वलित करें। पूजा के क्रम में शिव चालीसा का पाठ करें और अंत में आरती करें। पूजा के दौरान यदि कोई भूल हो जाए तो क्षमा याचना अवश्य करें।
शिवलिंग पर जल अर्पित करने के दौरान विशेष मंत्रों का उच्चारण करना भी लाभकारी माना जाता है। उदाहरण के लिए,
शिवलिंग जल अर्पण मंत्र:
“मन्दाकिन्यास्तु यद्वारि सर्वपापहरं शुभम्। तदिदं कल्पितं देव स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्॥ श्रीभगवते साम्बशिवाय नमः। स्नानीयं जलं समर्पयामि।”
इसके अलावा शक्तिशाली शिव मंत्रों का जप भी पूजा में ऊर्जा और सकारात्मक प्रभाव लाता है, जैसे:
ऐं ह्रीं श्रीं ‘ऊँ नमः शिवाय:’ श्रीं ह्रीं ऐं। ऊँ हौं जूं स:
इस प्रकार विधिवत पूजा और जलाभिषेक करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।