शिव जी की पूजा में क्यों नहीं बजाते शंख
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शंख की उत्पत्ति
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए विष्णुजी ने एक ब्राह्मण का रूप धारण कर शंखचूड़ से छलपूर्वक उसका श्रीकृष्ण कवच दान में ले लिया। इसके बाद उन्होंने स्वयं शंखचूड़ का रूप धारण कर उसकी पत्नी तुलसी के पतिव्रत धर्म को भंग कर दिया। श्रीकृष्ण कवच के नष्ट होने और तुलसी के पतिव्रत धर्म टूटने के बाद, भगवान शिव ने अपने विजय नामक त्रिशूल से शंखचूड़ का वध कर दिया। उसके वध के बाद, उसकी हड्डियों से शंख की उत्पत्ति हुई। यही कारण है कि शंख को पवित्र और शुभ माना जाता है, लेकिन भगवान शिव को शंख से जल अर्पित करना वर्जित है।
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