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Mahakumbh 2025: आखिर 12 वर्ष बाद ही क्यों होता है महाकुंभ का आयोजन? जानें इसका धार्मिक महत्व

Tue, 03 Dec 2024 12:10 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

क्या आप जानते हैं कि महाकुंभ का अद्वितीय आयोजन हर 12 साल बाद ही क्यों किया जाता है? दरअसल इस मेले के आयोजन के पीछे गहरी पौराणिक मान्यताएं और परंपराएं जुड़ी हुई हैं। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं...
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12 वर्ष बाद ही क्यों होता है महाकुंभ का आयोजन? - फोटो : amar ujala
Why Maha Kumbh Is Celebrated Every 12 Years: कुंभ मेला भारतीय संस्कृति का एक अद्वितीय धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन माना जाता है। यह भारत की सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो हर 12 वर्षों में विशेष रूप से चार स्थानों- प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में आयोजित होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस आयोजन में पवित्र नदियों में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह अद्वितीय आयोजन हर 12 साल बाद ही क्यों किया जाता है? दरअसल इस मेले के आयोजन के पीछे गहरी पौराणिक मान्यताएं और परंपराएं जुड़ी हुई हैं। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं...

कब से कब तक लगेगा महाकुंभ?
हिन्दू पंचांग के अनुसार पौष पूर्णिमा के दिन महाकुंभ आरंभ होगा और महाशिवरात्रि के साथ इसका समाप्त हो जाएगा। साल 2025 में महाकुंभ 13 जनवरी से आरंभ होगा और 26 फरवरी 2025 को समाप्त होगा। महाकुंभ पूरे 45 दिनों तक चलेगा। 
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महाकुंभ 2025 प्रमुख स्नान तिथियां - फोटो : Amar Ujala
महाकुंभ 2025 प्रमुख स्नान तिथियां
महाकुंभ 2025 प्रयागराज में 13 जनवरी से शुरू होकर 26 फरवरी तक चलेगा। इस दौरान कई महत्वपूर्ण शाही स्नान तिथियां हैं:
  • 13 जनवरी 2025: पौष पूर्णिमा (पहला शाही स्नान)
  • 14 जनवरी 2025: मकर संक्रांति (दूसरा शाही स्नान)
  • 29 जनवरी 2025: मौनी अमावस्या (तीसरा शाही स्नान)
  • 3 फरवरी 2025: बसंत पंचमी (चौथा शाही स्नान)
  • 12 फरवरी 2025: माघ पूर्णिमा (पांचवा शाही स्नान)
  • 26 फरवरी 2025: महाशिवरात्रि (अंतिम शाही स्नान)
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क्यों हर 12 वर्ष में लगता है कुंभ मेला? - फोटो : adobestock
क्यों हर 12 वर्ष में लगता है कुंभ मेला?
मान्यता है कि कुंभ मेले की उत्पत्ति समुद्र मंथन की प्राचीन कथा से जुड़ी है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवताओं और असुरों ने अमृत प्राप्त करने के लिए समुद्र मंथन किया था। अमृत कलश को लेकर देवताओं और असुरों के बीच 12 दिव्य दिनों तक संघर्ष चला था। ये 12 दिन पृथ्वी के 12 वर्षों के बराबर माने जाते हैं। 

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क्यों हर 12 वर्ष में लगता है कुंभ मेला? - फोटो : adobestock
कथा के अनुसार, इस दौरान अमृत की कुछ बूंदें 12 स्थानों पर गिरी थीं, जिनमें से चार स्थान पृथ्वी पर स्थित हैं, जो प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक हैं। यही कारण है कि इन स्थानों पर कुंभ मेला आयोजित किया जाता है। वहीं ज्योतिषीय दृष्टिकोण से देखा जाए तो बृहस्पति ग्रह हर 12 वर्षों में 12 राशियों का चक्र पूरा करता है। ऐसे में कुंभ मेला का आयोजन उस समय होता है, जब बृहस्पति किसी विशेष राशि में स्थित होते हैं।
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शाही स्नान का महत्व क्या है? - फोटो : adobestock
शाही स्नान का महत्व क्या है?
कुंभ मेले में पवित्र नदियों में स्नान करना अत्यधिक शुभ माना जाता है। माना जाता है कि इस दौरान नदियों का जल अमृत के समान पवित्र होता है, इसलिए इस दौरान श्रद्धालु दूर-दूर से स्नान करने आते हैं। प्रयागराज के संगम स्थल, जहां गंगा, यमुना और सरस्वती का मिलन होता है, को विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है। श्रद्धालु यहां स्नान कर अपने पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 


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