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जन्माष्टमी 2020: भूलकर भी नहीं करने चाहिए ये कार्य, व्रत और पूजा का नहीं मिलता है फल

Wed, 12 Aug 2020 06:46 AM IST
Shashi Shashi ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
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कृष्ण जन्माष्टमी 2020 - फोटो : अमर उजाला
कृष्ण जन्माष्टमी भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के मनाई जाती है, इसबार यह त्योहर 12 अगस्त को मनाया जाएगा। कृष्ण जन्मोत्सव के दिन लोग पूरे दिन व्रत रखकर कृष्ण जन्म के बाद उनकी पूजा करके व्रत का पारण करते हैं। कृष्ण जी को प्रसन्न करने के लिए कई तरह के पकवान अर्पित किए जाते हैं। उन्हें झूला-झूलाते हैं। लेकिन इस दिन कुछ कार्य नहीं करना चाहिए, नहीं को कृष्ण जी की कृपा प्राप्त नहीं होती है। और पूजा का पूर्ण फल भी प्राप्त नहीं होता है। 

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कृष्ण जन्माष्टमी 2020 इस दिन तुलसी नहीं तोड़नी चाहिए(प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया
भगवान विष्णु को तुलसी अति प्रिय है, कृष्ण जी भी उन्हीं का अवतार है, इसलिए उन्हें भी तुलसी प्रिय हैं। इसलिए जन्माष्टमी के दिन भूलकर भी तुलसी नहीं तोड़नी चाहिए, कृष्ण जी को अर्पित करने के लिए एक दिन पहले ही तुलसी तोड़ कर रख लेनी चाहिए तुलसी के पत्तों को बासी नहीं माना जाता है। 
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जन्माष्टमी के दिन चावल का सेवन न करें(प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया
जिस तरह से एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित माना गया है। उसी तरह से जन्माष्टमी के दिन व्रत रखने वालों को इस दिन चावल नहीं खाना चाहिए, साथ ही जो लोग व्रत न रखते हो वो भी इस दिन चावल न खाएं।

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जन्माष्टमी के दिन प्याज लहसुन का प्रयोग न करें(प्रतीकात्मक तस्वीर)
जन्माष्टमी के दिन सातविक भोजन ही करना चाहिए। इस दिन भोजन में लहसुन प्याज का प्रयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि लहसुन प्याज को तामसिक श्रेणी में रखा जाता है। भूलकर भी मांस मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। 
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गाय को नहीं सताना चाहिए (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया
कृष्ण जी को गाय बेहद प्रिय हैं, बालपन में वे ग्वाल-बालो के साथ गाय चराने जाया करते थे। इसलिए कृष्ण जी को ग्वाला भी कहा जाता है। इसलिए जन्माष्टमी या किसी भी दिन गाय एवं बछड़े को भूलकर भी न मारें, नहीं तो कृष्ण जी रुष्ट हो जाते हैं। गायों की सेवा करने से कृष्ण जी प्रसन्न होते हैं। 
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कृष्ण जन्माष्टमी 2020 (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : krishna
जन्माष्टमी के दिन किसी का अपमान नहीं करना चाहिए, न ही किसी निर्धन का उपहास उड़ाना चाहिए, कृष्ण जी सभी को एक समान मानते थे। उनकी और सुदामा की मित्रता आज के समय में भी उदहारण है।  
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krishna janmashtami 2020(प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTI
जन्माष्टमी के दिन पूरे पवित्र मन से व्रत और पूजा करनी चाहिए, ब्रह्मचर्य का पालन करना भी अति आवश्यक होता है। किसी के लिए भी अपने मन में बैर की भावना नहीं रखनी चाहिए। और अपना समय भगवान के भजन,ध्यान में लगाना चाहिए। जो लोग इन बातों को नहीं मानते हैं उन्हें व्रत के फल की पूर्ण प्राप्ति नहीं होती है। 
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