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Janmashtami 2025: 15 या 16 अगस्त किस दिन मनाया जाएगा कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व? जानें शुभ मुहूर्त और व्रत नियम

Wed, 30 Jul 2025 12:25 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

इस बार तिथि को लेकर लोगों में कुछ भ्रम की स्थिति देखी जा रही है। सवाल है कि जन्माष्टमी 15 अगस्त को मनाई जाए या 16 अगस्त को? ऐसे में आइए जानते हैं कि श्री कृष्ण जन्माष्टमी किस दिन मनाई जाएगी।
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कृष्ण जन्माष्टमी 2025 - फोटो : freepik
Krishna Janmashtami 2025 Date And Time: हर साल भाद्रपद कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि पर श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 2025 में भगवान श्रीकृष्ण का 5252वां जन्मोत्सव मनाया जाएगा। हालांकि इस बार तिथि को लेकर लोगों में कुछ भ्रम की स्थिति देखी जा रही है। 

इस वर्ष अष्टमी तिथि की शुरुआत 15 अगस्त की रात को हो रही है और यह 16 अगस्त को शाम तक रहेगी। वहीं, रोहिणी नक्षत्र का आरंभ 17 अगस्त की सुबह होगा। ऐसे में यह सवाल उठता है कि जन्माष्टमी 15 अगस्त को मनाई जाए या 16 अगस्त को? ऐसे में आइए जानते हैं कि श्री कृष्ण जन्माष्टमी किस दिन मनाई जाएगी।

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किस दिन मनाया जाएगा कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व - फोटो : Adobe Stock
किस दिन मनाया जाएगा कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व
परंपरा के अनुसार जब भी अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र एक साथ न हो, तो व्रत और पूजा उदया तिथि को करना उचित माना जाता है। इसलिए इस बार जन्माष्टमी का पर्व 16 अगस्त 2025, शनिवार को मनाया जाएगा।

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कृष्ण जन्माष्टमी 2025 तिथि और शुभ मुहूर्त - फोटो : Adobe Stock
कृष्ण जन्माष्टमी 2025 तिथि और शुभ मुहूर्त
अष्टमी तिथि आरंभ: 15 अगस्त 2025 को रात 11:49 बजे
अष्टमी तिथि समाप्त: 16 अगस्त 2025 को रात 09:34 बजे
रोहिणी नक्षत्र आरंभ: 17 अगस्त 2025 को सुबह 04:38 बजे
रोहिणी नक्षत्र समाप्त: 18 अगस्त 2025 को तड़के 03:17 बजे
चन्द्रोदय का समय: 16 अगस्त को रात 10:46 बजे
 

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जन्माष्टमी व्रत के नियम - फोटो : Adobe Stock
जन्माष्टमी व्रत के नियम
  • इस दिन व्रत के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक होता है। 
  • जन्माष्टमी के दिन उपवासी व्यक्ति अन्न ग्रहण नहीं करता। हालांकि फलाहार (फल, दूध, मखाने आदि) सेवन की अनुमति होती है।
  • दिनभर सात्विक आहार और आचरण का पालन करना आवश्यक है। मांसाहार, लहसुन-प्याज और तामसिक भोजन से परहेज करें।
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जन्माष्टमी व्रत के नियम - फोटो : Adobe Stock
  • रात्रि 12 बजे श्रीकृष्ण जन्म के समय पूजा की जाती है। भक्त झूला झुलाकर, कृष्ण की आरती उतारकर और भजन-कीर्तन के माध्यम से भगवान का स्वागत करते हैं।
  • उपवास का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद निर्धारित समय पर किया जाता है।
  • हालांकि कुछ लोग रात्रि 12 बजे पूजा के बाद ही व्रत तोड़ते हैं, परंतु परंपरा के अनुसार पारण अगले दिन ही करना अधिक शुद्ध माना गया है।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

 

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