जन्माष्टमी व्रत के नियम
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- रात्रि 12 बजे श्रीकृष्ण जन्म के समय पूजा की जाती है। भक्त झूला झुलाकर, कृष्ण की आरती उतारकर और भजन-कीर्तन के माध्यम से भगवान का स्वागत करते हैं।
- उपवास का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद निर्धारित समय पर किया जाता है।
- हालांकि कुछ लोग रात्रि 12 बजे पूजा के बाद ही व्रत तोड़ते हैं, परंतु परंपरा के अनुसार पारण अगले दिन ही करना अधिक शुद्ध माना गया है।
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