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Krishna Janmashtami 2024: जन्माष्टमी पर कान्हा को प्रसन्न करने के लिए पहनें इस रंग के कपड़े

Wed, 21 Aug 2024 06:44 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कान्हा को प्रिय हैं ये रंग - फोटो : अमर उजाला
Krishna Janmashtami 2024: भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जन्माष्टमी मनाई जाती है। इस वर्ष 26 अगस्त 2024 को कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी। इस दिन कृष्ण जी के बाल रूप की पूजा की जाती है। इस साल जन्माष्टमी पर सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। योग का समय 26 अगस्त दोपहर 03:55 से लेकर 27 अगस्त को सुबह 05:57 तक रहने वाला है। धार्मिक मान्यता है कि इस योग में लड्डू गोपाल की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। साथ ही परिवार में संपन्नता बनी रहती हैं। ये दिन सभी कृष्ण भक्तों के लिए बेहद खास होता है।

इस दौरान महिलाएं संतान प्राप्ति के लिए उपवास रखती है। शास्त्रों में जन्माष्टमी के व्रत को एक हजार एकादशी व्रत के समान माना गया है। वहीं इस दिन लड्डू गोपाल के प्रिय रंगों के वस्त्र धारण करने से भगवान कृष्ण की कृपा बनी रहती है। ऐसे में आइए इन रंगों के बारे में विस्तार से जान लेते हैं।
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कान्हा को प्रिय हैं ये रंग - फोटो : अमर उजाला
जन्माष्टमी 2024 मुहूर्त
जन्माष्टमी पर पूजा का शुभ मुहूर्त देर रात 12:00 से लेकर 12:45 ए एम (अगस्त 27) तक रहने वाला है। इस मुहूर्त की अवधि के अनुसार आप बाल गोपाल की पूजा कर सकते हैं।
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कान्हा को प्रिय हैं ये रंग - फोटो : अमर उजाला
कृष्ण जी के प्रिय रंग
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कृष्ण जी को पीला और मोरपंखी रंग अति प्रिय है। इसके अलावा गुलाबी और लाल रंग भी उनका पसंदीदा माना जाता है। ऐसे में जन्माष्टमी पर महिलाएं इनमें से किसी भी रंग की साड़ी पहन सकती हैं। आप चाहे तो, चमकीले रंगों का भी चयन कर सकते हैं। वहीं जन्माष्टमी पर पुरूषों को सफेद और नीले रंग का कुर्ता पजामा पहनना चाहिए। ये रंग कृष्ण जी को प्रिय है।

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कान्हा को प्रिय हैं ये रंग - फोटो : अमर उजाला
चंदन का टीका
जन्माष्टमी के दिन बाल गोपाल को चंदन का टीका लगाना चाहिए। फिर आप भी इसका इस्तेमाल करें। ऐसा करने से जीवन में सकारात्मकता बनी रहती है। इस दौरान रातरानी के फूलों का इत्र लगाएं। इस खुशबू से कान्हा जी प्रसन्न होते हैं।

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कान्हा को प्रिय हैं ये रंग - फोटो : अमर उजाला
जन्माष्टमी महत्व
भगवान कृष्ण के जन्म को जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। उनका जन्म भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के संयोग में हुआ था। इस दिन कृष्ण जी के बाल रूप की पूजा की जाती है। साथ ही व्रत रखने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती हैं।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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