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Ganga Dussehra 2019 : जानें गंगा में डुबकी लगाने और स्नान करने का मंत्र

Wed, 12 Jun 2019 07:43 AM IST
Madhukar Mishra पं. जयगोविन्द शास्त्री, ज्योर्तिविद्
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Ganga Dussehra 2019 - फोटो : Rohit Jha
आदिकाल में ब्रह्मा जी ने सृष्टि की 'मूलप्रकृति' से निवेदन किया कि हे पराशक्ति! आप संपूर्ण लोकों का आदि कारण बनें, मैं तुमसे ही संसार की सृष्टि आरंभ करूंगा। ब्रह्मा जी के निवेदन पर मूलप्रकृति- गायत्री, सरस्वती, लक्ष्मी, ब्रह्मविद्या उमा, शक्तिबीजा, तपस्विनी और धर्मद्रवा इन सात रूपों में अभिव्यक्त हुईं। इनमें सातवीं 'पराप्रकृति 'धर्मद्रवा' को सभी धर्मों में प्रतिष्ठित देखकर ब्रह्मा जी ने उन्हें अपने कमण्डल में धारण कर लिया। 
 


इस तरह शिव की जटाओं में पहुंची गंगा

वामन अवतार में बलि के यज्ञ के समय जब भगवान श्रीविष्णु का एक चरण आकाश एवं ब्रह्माण्ड को भेदकर ब्रह्मा जी के सामने स्थित हुआ तब ब्रह्मा ने अपने कमण्डल के जल से श्रीविष्णु के चरणों की पूजा की। पांव धुलते समय उस चरण का जल हेमकूट पर्वत पर गिरा, वहां से भगवान शंकर के पास पहुंचकर, वह जल गंगा के रूप मे उनकी जटा में स्थित हो गया। 
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गंगा दशहरा 2019 - फोटो : Rohit Jha
पुरखों को तारने के लिए किया कठिन तप

सातवीं प्रकृति गंगा बहुत काल तक भगवान शंकर की जटा में ही भ्रमण करती रहीं। इसके बाद सूर्यवंशी राजा दिलीप के पुत्र भागीरथ ने अपने पूर्वज राजा सगर की दूसरी पत्नी सुमति के साठ हज़ार पुत्रों का विष्णु के अंशावतार कपिल मुनि के श्राप से उद्धार करने के लिए शंकर की घोर तपस्या की। तपस्या से प्रसन्न होकर शंकर ने गंगा को पृथ्वी पर उतारा।

'ज्येष्ठ मासे सिते पक्षे दशमी हस्तसंयुता। हरते दश पापानि तस्माद् दसहरा स्मृता।। 

अर्थात् - ज्येष्ठ मास शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि बुधवार, हस्त नक्षत्र में दस प्रकार के पापों का नाश करने वाली गंगा का पृथ्वी पर आगमन हुआ। उस समय गंगा तीन धाराओं में प्रकट होकर तीनों लोकों में गयीं और संसार में त्रिसोता के नाम से विख्यात हुईं।  
 
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Ganga Dussehra 2019 - फोटो : Rohit Jha
जानें कब गंगा लौट जाएंगी स्वर्ग लोक

शिव, ब्रह्मा और विष्णु के संयोग से पवित्र होकर त्रिभुवन को पावन करती हुई, समस्त पापों-दुखों और शोकों से मुक्त करती हुई गंगा वर्तमान अट्ठाईसवें चतुर्युगीय में कलियुग के प्रथम चरण के आरंभ होते ही कुछ सहस्त्र वर्षों बाद जब माँ पृथ्वी के पाप का बोझ उठाना कठिन हो जाएगा तब गंगा पृथ्वी लोक त्यागकर अपने लोक चली जायेंगी।

जानें कैसे दूर होगा नजर दोष

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गंगा दशहरा 2019
दस पापों से मुक्ति दिलाता है गंगा स्नान

गंगा ध्यान एवं स्नान से प्राणी दस प्रकार के दोषों- काम, क्रोध, लोभ, मोह, मत्सर, ईर्ष्या, ब्रह्महत्या, छल, कपट, परनिंदा जैसे पापों से मुक्त हो जाता है। इतना ही नहीं अवैध संबंध, अकारण जीवों को कष्ट पहुंचाने, असत्य बोलने व धोखा देने से जो पाप लगता है, वह पाप भी गंगा 'दसहरा' के दिन गंगा स्नान से धुल जाता है।
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गंगा दशहरा 2019
गंगा स्नान का महामंत्र

गंगा दशहरा के महापर्व पर भक्तों को स्नान करते समय माँ गंगा का इस मंत्र के द्वारा ध्यान करना चाहिए — 
'विष्णु पादार्घ्य सम्भूते गंगे त्रिपथगामिनी! धर्मद्रवीति विख्याते पापं मे हर जाह्नवी।'

गंगा में डुबकी लगाने का मंत्र

गंगा में डुबकी लगाते समय श्रीहरि द्वारा बताए गए इस सर्व पापहारी मंत्र को जपने से व्यक्ति को तत्क्षण लाभ मिलता है —
'ॐ नमो गंगायै विश्वरूपिण्यै नारायण्यै नमो नमः। '

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