करवा चौथ व्रत और पूजा की विधि
1. ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सरगी ग्रहण करें
करवा चौथ के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद सूर्योदय से पहले सरगी खाएं। सरगी में फल, दूध, नारियल पानी और मिठाई जैसी चीजें शामिल की जा सकती हैं। दिनभर निर्जला व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए पौष्टिक आहार लेना उपयोगी होता है। अपनी सेहत के अनुसार ही उपवास का तरीका चुनें।
2. व्रत का संकल्प लें
सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करने के बाद व्रत शुरू करें। पूजा के समय श्रद्धापूर्वक संकल्प लिया जाता है। इसके लिए इस मंत्र का जाप कर सकती हैं:
मंत्र:
मम सुख-सौभाग्य-पुत्र-पौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये।
3. पूजा की तैयारी करें
दिन के समय पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री व्यवस्थित कर लें। परंपरा के अनुसार, गणेश जी, माता पार्वती, भगवान शिव और कार्तिकेय की मूर्तियां स्थापित की जाती हैं। यदि मूर्तियां उपलब्ध न हों, तो उनकी तस्वीरों के सामने भी पूजा की जा सकती है।
4. शाम को सोलह श्रृंगार करके पूजा करें
शाम के समय स्नान या हाथ-पैर धोकर स्वच्छ वस्त्र पहनें और सोलह श्रृंगार करें। इसके बाद शुभ मुहूर्त में पूजा की चौकी सजाएं और उस पर देवी-देवताओं की स्थापना करें। कुछ परंपराओं में मिट्टी या बालू की वेदी बनाकर उस पर पीपल के वृक्ष का चित्र बनाया जाता है।
5. भगवान गणेश और शिव परिवार की आराधना करें
पूजा की शुरुआत भगवान गणेश से करें। इसके बाद माता पार्वती, भगवान शिव और कार्तिकेय की पूजा करें। सभी देवी-देवताओं को अक्षत, रोली, हल्दी, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य और मिठाई अर्पित करें। माता पार्वती को सुहाग की सामग्री और चुनरी चढ़ाकर अखंड सौभाग्य की कामना करें।
6. करवा चौथ की कथा सुनें और आरती करें
पूजा के दौरान करवा चौथ व्रत की कथा सुनें या पढ़ें। कथा के बाद भगवान गणेश की आरती करें और फिर माता पार्वती सहित शिव परिवार की आरती करें। पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा मांगें और अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य तथा वैवाहिक जीवन में सुख-शांति की प्रार्थना करें।
7. चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलें
रात में चंद्रमा दिखाई देने पर उनकी पूजा करें और जल अर्पित करें। इसके बाद छलनी में दीपक रखकर पहले चंद्रमा और फिर अपने पति का चेहरा देखें। परिवार की परंपरा के अनुसार करवा फेरने की रस्म पूरी करें और सास या घर के बड़ों का आशीर्वाद लें।
अंत में पति के हाथों जल ग्रहण करके व्रत का पारण करें। इसके बाद प्रसाद बांटें और भोजन करें। इसी के साथ करवा चौथ का उपवास पूरा होता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।