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करवा चौथ 2026 पूजा विधि: आज 5 शुभ संयोग में करवा चौथ व्रत, जानें शुभ मुहूर्त, मंत्र और चंद्रोदय का समय

Thu, 29 Oct 2026 11:48 AM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Karwa chauth 2026 Puja Vidhi: इस बार करवा चौथ पर पांच शुभ योग बनने की बात कही जा रही है। ऐसे में आइए जानते हैं करवा चौथ 2026 के पूजा मुहूर्त, चंद्रोदय का समय, शुभ संयोग, पूजन सामग्री, मंत्र और व्रत की संपूर्ण विधि।
 
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करवा चौथ 2026 - फोटो : AI
Karva chauth 2026 Puja Muhurat Moon rise Time: करवा चौथ का पावन पर्व आज, 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार को मनाया जा रहा है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में प्रेम व खुशहाली की कामना के साथ उपवास रखती हैं। परंपरा के अनुसार, यह व्रत सूर्योदय से शुरू होता है और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोला जाता है। इस दौरान व्रती महिलाएं पूरे दिन अन्न और जल का त्याग करती हैं। हालांकि, व्रत रखने की परंपराएं अलग-अलग परिवारों में भिन्न हो सकती हैं।

इस बार करवा चौथ पर पांच शुभ योग बनने की बात कही जा रही है। ऐसे में आइए जानते हैं करवा चौथ 2026 के पूजा मुहूर्त, चंद्रोदय का समय, शुभ संयोग, पूजन सामग्री, मंत्र और व्रत की संपूर्ण विधि।

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करवा चौथ 2026 के शुभ मुहूर्त - फोटो : Freepik
करवा चौथ 2026 के शुभ मुहूर्त
चतुर्थी तिथि का आरंभ: 29 अक्टूबर, रात 01:06 बजे से
चतुर्थी तिथि की समाप्ति: 29 अक्टूबर, रात 10:09 बजे तक
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:44 बजे से 5:35 बजे तक
सरगी ग्रहण करने का समय: सुबह 6:31 बजे सूर्योदय से पहले
करवा चौथ पूजा मुहूर्त: शाम 5:38 बजे से 6:56 बजे तक
चंद्रोदय का समय: रात 8:17 बजे 
चंद्रमा को अर्घ्य देने का समय: चंद्रोदय के बाद, रात 8:17 बजे से

हालांकि, चंद्रोदय का समय स्थान के अनुसार बदल सकता है। अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि कर लें।

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करवा चौथ पर बन रहे हैं 5 शुभ संयोग - फोटो : AI
करवा चौथ पर बन रहे हैं 5 शुभ संयोग
1. लक्ष्मी नारायण योग
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, तुला राशि में बुध और शुक्र की युति से लक्ष्मी नारायण योग का निर्माण हो रहा है। ज्योतिष में इस योग को सुख-सुविधाओं, समृद्धि और आर्थिक उन्नति से जोड़कर देखा जाता है।

2. परिघ योग
करवा चौथ के दिन परिघ योग का संयोग भी बन रहा है। पंचांग के अनुसार, यह योग सुबह से लेकर देर रात 12 बजकर 6 मिनट तक रहने वाला है। ज्योतिषीय मान्यताओं में इस योग का विशेष महत्व बताया गया है।

3. गुरुवार का शुभ संयोग
इस साल करवा चौथ गुरुवार को पड़ रहा है। गुरुवार का दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। वहीं, माता लक्ष्मी की आराधना को सुख-समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि दोनों की पूजा से परिवार में सुख-शांति और दांपत्य जीवन में मधुरता की कामना की जाती है।

4. बुधादित्य योग
तुला राशि में सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य योग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में इस योग को बुद्धिमत्ता, कार्यक्षमता और निर्णय लेने की क्षमता से संबंधित माना जाता है।

5. त्रिग्रही योग
तुला राशि में सूर्य, बुध और शुक्र की मौजूदगी से त्रिग्रही योग का निर्माण हो रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस योग का संबंध सुख-सुविधाओं, सामाजिक प्रतिष्ठा और जीवन में सकारात्मक अवसरों से जोड़ा जाता है।

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करवा चौथ पूजा सामग्री - फोटो : amar ujala
करवा चौथ 2026 की पूजा सामग्री
करवा चौथ की पूजा से पहले सभी आवश्यक वस्तुओं को एक जगह एकत्र कर लेना चाहिए। इससे पूजा के दौरान किसी सामग्री की कमी नहीं होगी।
  • मिट्टी का करवा और उसका ढक्कन
  • पूजा की थाली और लकड़ी की चौकी
  • करवा माता, भगवान गणेश, माता पार्वती, भगवान शिव और कार्तिकेय की मूर्तियां या तस्वीरें
  • माता के लिए चुनरी और पूजा में चढ़ाने के लिए नए वस्त्र
  • गणेश जी, भगवान शिव और कार्तिकेय के लिए वस्त्र
  • करवा चौथ व्रत कथा और आरती की पुस्तक
  • चंद्र दर्शन के लिए छलनी
  • सोलह श्रृंगार की सामग्री
  • कलश, दीपक और रूई की बाती
  • अक्षत, रोली, कुमकुम, चंदन और हल्दी
  • फूल, मौली और रक्षासूत्र
  • जल से भरा लोटा या गिलास
  • शक्कर का बूरा और मिठाई
  • पान का पत्ता, दही और कच्चा दूध
  • कपूर और अगरबत्ती
  • गेहूं, लहुआ और मौसमी फल
  • आठ पूरियों की अठावरी
  • शहद और गाय का घी
  • पूजा के लिए दक्षिणा
  • कुशा या सींक
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करवा चौथ 2026 पूजा मंत्र - फोटो : amar ujala
करवा चौथ 2026 पूजा मंत्र
गणेश पूजा मंत्र
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
ओम गं गणपतये नमो नम:

शिव पूजा मंत्र
ओम नम: शिवाय

देवी पार्वती पूजा मंत्र
देहि सौभाग्य आरोग्यं देहि मे परम् सुखम्।
सन्तान देहि धनं देहि सर्वकामांश्च देहि मे।।

कार्तिकेय जी का मंत्र 
ॐ षडमुखाय विद्महे मयूर वाहनाय धीमहि तन्नो कार्तिक प्रचोदयात.

चंद्रमा अर्घ्य मंत्र
गगनार्णवमाणिक्य चन्द्र दाक्षायणीपते।
गृहाणार्घ्यं मया दत्तं गणेशप्रतिरूपक॥
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करवा चौथ की सरल पूजा विधि - फोटो : अमर उजाला
करवा चौथ व्रत और पूजा की विधि
1. ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सरगी ग्रहण करें

करवा चौथ के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद सूर्योदय से पहले सरगी खाएं। सरगी में फल, दूध, नारियल पानी और मिठाई जैसी चीजें शामिल की जा सकती हैं। दिनभर निर्जला व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए पौष्टिक आहार लेना उपयोगी होता है। अपनी सेहत के अनुसार ही उपवास का तरीका चुनें।

2. व्रत का संकल्प लें
सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करने के बाद व्रत शुरू करें। पूजा के समय श्रद्धापूर्वक संकल्प लिया जाता है। इसके लिए इस मंत्र का जाप कर सकती हैं:
मंत्र:
मम सुख-सौभाग्य-पुत्र-पौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये।


3. पूजा की तैयारी करें
दिन के समय पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री व्यवस्थित कर लें। परंपरा के अनुसार, गणेश जी, माता पार्वती, भगवान शिव और कार्तिकेय की मूर्तियां स्थापित की जाती हैं। यदि मूर्तियां उपलब्ध न हों, तो उनकी तस्वीरों के सामने भी पूजा की जा सकती है।

4. शाम को सोलह श्रृंगार करके पूजा करें
शाम के समय स्नान या हाथ-पैर धोकर स्वच्छ वस्त्र पहनें और सोलह श्रृंगार करें। इसके बाद शुभ मुहूर्त में पूजा की चौकी सजाएं और उस पर देवी-देवताओं की स्थापना करें। कुछ परंपराओं में मिट्टी या बालू की वेदी बनाकर उस पर पीपल के वृक्ष का चित्र बनाया जाता है।

5. भगवान गणेश और शिव परिवार की आराधना करें
पूजा की शुरुआत भगवान गणेश से करें। इसके बाद माता पार्वती, भगवान शिव और कार्तिकेय की पूजा करें। सभी देवी-देवताओं को अक्षत, रोली, हल्दी, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य और मिठाई अर्पित करें। माता पार्वती को सुहाग की सामग्री और चुनरी चढ़ाकर अखंड सौभाग्य की कामना करें।

6. करवा चौथ की कथा सुनें और आरती करें
पूजा के दौरान करवा चौथ व्रत की कथा सुनें या पढ़ें। कथा के बाद भगवान गणेश की आरती करें और फिर माता पार्वती सहित शिव परिवार की आरती करें। पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा मांगें और अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य तथा वैवाहिक जीवन में सुख-शांति की प्रार्थना करें।

7. चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलें
रात में चंद्रमा दिखाई देने पर उनकी पूजा करें और जल अर्पित करें। इसके बाद छलनी में दीपक रखकर पहले चंद्रमा और फिर अपने पति का चेहरा देखें। परिवार की परंपरा के अनुसार करवा फेरने की रस्म पूरी करें और सास या घर के बड़ों का आशीर्वाद लें।

अंत में पति के हाथों जल ग्रहण करके व्रत का पारण करें। इसके बाद प्रसाद बांटें और भोजन करें। इसी के साथ करवा चौथ का उपवास पूरा होता है।
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
 

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