Kanwar yatra 2025
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संयम, ब्रह्मचर्य और शुद्धता बनाए रखना जरूरी
अगर कोई शारीरिक या मानसिक रूप से अशांत है, जैसे कि क्रोध, लालच, झूठ बोलना या द्वेष में डूबा हुआ हो, तो उसे कांवड़ यात्रा नहीं करनी चाहिए। यात्रा के पहले संयम, ब्रह्मचर्य और शुद्धता बनाए रखना ज़रूरी होता है। अपवित्र मन और शरीर से गंगाजल ले जाना किसी अशुद्ध जल को भगवान शिव को चढ़ाने जैसा होता है, जो उचित नहीं माना जाता।