Kajari Teej Upay: कजरी तीज भाद्रपद माह का प्रमुख व्रत है, जिसे विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र और अविवाहित कन्याएं मनचाहा वर पाने के लिए रखती हैं। मान्यता है कि इसे करने से वैवाहिक सुख, संतान का आशीर्वाद और घर में खुशहाली मिलती है।
Kajari Teej Puja Vidhi: भाद्रपद माह का आगमन 10 अगस्त से हो रहा है और इसी महीने में कजरी तीज का पर्व भी मनाया जाता है। यह हिंदू धर्म के प्रमुख व्रतों और त्योहारों में से एक माना जाता है, जिसका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बहुत गहरा है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और वैवाहिक सुख के लिए व्रत रखती हैं, वहीं अविवाहित कन्याएं मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना से इसे करती हैं। Kajari Teej 2025: कजरी तीज पर पूजा के लिए चार सबसे खास मुहूर्त, जानिए इनके बारे में
मान्यता है कि कजरी तीज का व्रत सबसे पहले माता पार्वती ने रखा था। इस व्रत को करने से दांपत्य जीवन में प्रेम और सामंजस्य बढ़ता है, संतान सुख प्राप्त होता है और घर-परिवार में खुशहाली बनी रहती है। श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया यह व्रत जीवन से संकट दूर कर सुख-समृद्धि का मार्ग खोलता है। Bhadrapada 2025: भाद्रपद माह आरंभ, जानें इस माह का महत्त्व और पूजा पाठ के नियम
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कजरी तीज 2025
- फोटो : freepik
कजरी तीज तिथि
कजरी तीज हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। साल 2025 में यह व्रत मंगलवार, 12 अगस्त 2025 को पड़ेगा।
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Kajari Teej 2025
- फोटो : अमर उजाला
कजरी तीज शुभ मुहूर्त
तृतीया तिथि की शुरुआत: 11 अगस्त सुबह 10:33 बजे
तृतीया तिथि की समाप्ति: 12 अगस्त सुबह 08:40 बजे
पूजा की तारीख: 12 अगस्त 2025 (उदया तिथि मान्य)
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कजरी तीज 2025
- फोटो : Instagram
विशेष मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:23 – प्रातः 05:06
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:38 – दोपहर 03:31
गोधूलि मुहूर्त: सायं 07:03 – सायं 07:25
निशीथ काल मुहूर्त: रात्रि 12:05 –रात्रि 12:48
प्रातः स्नान करके साफ-सुथरे, लाल या पीले रंग के वस्त्र पहनें।
हाथ में जल लेकर भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें।
एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति या फोटो स्थापित करें।
भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भस्म और सफेद पुष्प अर्पित करें।
माता पार्वती को कुमकुम, मेहंदी, चूड़ी, सिंदूर, बिंदी और अन्य सुहाग सामग्री चढ़ाएँ।
धूप और दीप जलाकर पूजा करें, मंत्रों का जाप करें और आरती करें।
कजरी तीज की व्रत कथा का श्रद्धापूर्वक पाठ करें।
पूरे दिन उपवास रखें, व्रत निर्जला या फलाहार हो सकता है।
रात में चंद्रमा के उदय पर चंद्र दर्शन करें और अर्घ्य अर्पित करें।
अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण करें और भोजन ग्रहण करें।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।