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Jyeshtha Purnima 2026 Date: 29 या 30 जून कब है ज्येष्ठ पूर्णिमा? जानें क्या एक ही दिन होगा व्रत और स्नान-दान

Mon, 22 Jun 2026 03:53 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Jyeshtha Purnima Kab Hai: ज्येष्ठ पूर्णिमा पर व्रत रखने, पवित्र स्नान करने और दान करने का विशेष महत्व माना गया है। आइए जानते हैं इस साल ज्येष्ठ पूर्णिमा पर व्रत, स्नान और दान कि तिथि क्या रहने वाली है। 
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ज्येष्ठ पूर्णिमा 2026 - फोटो : AI
Jyeshtha Purnima 2026 Date: ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को ज्येष्ठ पूर्णिमा कहा जाता है। इस दिन व्रत रखने, पवित्र स्नान करने और दान करने का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इन कार्यों से व्यक्ति के पाप क्षीण होते हैं और पुण्य में वृद्धि होती है। कई बार पूर्णिमा तिथि, व्रत, स्नान और दान एक ही दिन संपन्न होते हैं, जबकि कुछ स्थितियों में व्रत पहले और स्नान-दान अगले दिन किया जाता है। यह अंतर चंद्रमा के उदय समय पर निर्भर करता है। इस दिन भगवान सत्यनारायण की पूजा करने के साथ-साथ शाम के समय माता लक्ष्मी और चंद्रदेव को अर्घ्य अर्पित करने की परंपरा है।
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ज्येष्ठ पूर्णिमा 2026 की तिथि - फोटो : Freepik
ज्येष्ठ पूर्णिमा 2026 की तिथि
वैदिक पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि 29 जून को सुबह 3:06 बजे प्रारंभ होगी और 30 जून को सुबह 5:26 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के आधार पर यह व्रत 29 जून, सोमवार को रखा जाएगा।

एक ही दिन होंगे व्रत, स्नान और दान
इस बार पूर्णिमा तिथि के दिन ही सूर्योदय और चंद्रोदय दोनों हो रहे हैं। इसलिए 29 जून को ही व्रत, स्नान और दान तीनों कार्य एक साथ संपन्न किए जाएंगे।

शुभ योग और नक्षत्र
इस वर्ष ज्येष्ठ पूर्णिमा पर दो शुभ योग बन रहे हैं। प्रातःकाल में शुक्ल योग रहेगा, जो दोपहर 2:26 बजे तक प्रभावी रहेगा। इसके बाद ब्रह्म योग शुरू होगा। साथ ही मूल नक्षत्र प्रातःकाल से शुरू होकर 30 जून को सुबह 4:03 बजे तक रहेगा।
 
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ज्येष्ठ पूर्णिमा के प्रमुख मुहूर्त - फोटो : adobe
ज्येष्ठ पूर्णिमा के प्रमुख मुहूर्त
  • स्नान के लिए ब्रह्म मुहूर्त सबसे उत्तम माना गया है, जो सुबह 4:06 बजे से 4:46 बजे तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:57 बजे से 12:52 बजे तक रहेगा, जिसे शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है।
  • पूजा के लिए अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त सुबह 5:26 बजे से 7:11 बजे तक रहेगा, जबकि शुभ-उत्तम समय 8:55 बजे से 10:40 बजे तक है।
  • शाम को प्रदोष काल में, सूर्यास्त के बाद 7:23 बजे से 8:38 बजे तक माता लक्ष्मी की पूजा करना विशेष फलदायी रहेगा।
 

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चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय - फोटो : Freepik
चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय
29 जून को चंद्रमा का उदय शाम 7:16 बजे होगा, जबकि 30 जून को सुबह 5:15 बजे चंद्रास्त होगा। पूर्णिमा की रात चंद्रमा को अर्घ्य देने का विशेष महत्व माना गया है।

भद्रा का समय
ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन भद्रा का प्रभाव सुबह 5:26 बजे से शुरू होकर शाम 4:16 बजे तक रहेगा। इस दौरान भद्रा का निवास पाताल लोक में होगा। भद्रा काल में पूजा-पाठ और मंत्र जाप किया जा सकता है।
 
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ज्येष्ठ पूर्णिमा का महत्व - फोटो : adobe stock
ज्येष्ठ पूर्णिमा का महत्व
इस दिन व्रत रखकर भगवान सत्यनारायण की पूजा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है। शाम के समय माता लक्ष्मी की उपासना करने से धन और वैभव में वृद्धि होती है। वहीं चंद्रमा को अर्घ्य देने से मानसिक शांति मिलती है और मनोबल मजबूत होता है।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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