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Jyeshtha Masik Shivratri 2026: ज्येष्ठ माह में कब है मासिक शिवरात्रि, जानें डेट और पूजा का समय

Thu, 07 May 2026 12:43 AM IST
Megha Kumari धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Jyeshtha Masik Shivratri 2026: मासिक शिवरात्रि पर उपवास, मंत्र जाप और ध्यान करने से व्यक्ति के भीतर की नकारात्मकता दूर होती है और जीवन में संतुलन आता है।
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Jyeshtha Masik Shivratri 2026 - फोटो : अमर उजाला
Jyeshtha Masik Shivratri 2026: ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाता है। यह दिन भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद खास और महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि, इस दिन निशिता काल यानी मध्य रात्रि में महादेव का स्मरण और पूजा करने से प्रभु शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। शास्त्रों की मानें, तो यह व्रत मनचाहा जीवनसाथी पाने और वैवाहिक सुख के लिए भी फलदायी है। इससे जीवन में सकारात्मक बदलाव भी आते हैं। आइए जानते हैं कि, ज्येष्ठ माह में यह उपवास किस दिन रखा जाएगा।
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Jyeshtha Masik Shivratri 2026 - फोटो : adobe
ज्येष्ठ मासिक शिवरात्रि 2026 कब है 
  • पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 मई 2026 को सुबह 8 बजकर 31 मिनट से शुरू होगी।
  • इसका समापन 16 मई 2026 को सुबह 5 बजकर 11 मिनट पर होगा।
  • पूजा काल के आधार पर मासिक शिवरात्रि 15 मई 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी।
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Jyeshtha Masik Shivratri 2026 - फोटो : adobe
शुभ मुहूर्त और योग
  • निशिता काल पूजा मुहूर्त: रात 11:57 से 12:38 (16 मई)
  • आयुष्मान योग: 14 मई शाम 5:53 से 15 मई दोपहर 2:21 तक
  • सर्वार्थ सिद्धि योग: सुबह 5:30 से रात 8:14 तक

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Jyeshtha Masik Shivratri 2026 - फोटो : adobe
शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं
  • शहद, दही और गेहूं अर्पित करने से धन-धान्य में वृद्धि होती हैं।
  • बेलपत्र चढ़ाना अनिवार्य और अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • भांग, धतूरा और शमी पत्र अर्पित करने से महादेव प्रसन्न होते हैं।
  • दूध और जल से अभिषेक करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
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Jyeshtha Masik Shivratri 2026 - फोटो : freepik
मासिक शिवरात्रि पूजा मंत्र और आरती

महामृत्युंजय मंत्र

ऊँ हौं जूं स: ऊँ भुर्भव: स्व: ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
ऊर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ऊँ भुव: भू: स्व: ऊँ स: जूं हौं ऊँ।।


शिवजी की आरती : ॐ जय शिव ओंकारा

जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव...॥

एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव...॥

दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव...॥

अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव...॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव...॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव...॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव...॥

काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव...॥

त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव...॥
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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