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Jagannath Rath Yatra: जगन्नाथ मंदिर के ऊपर क्यों नहीं उड़ते पक्षी? जानें इसके पीछे का रहस्य

Sat, 28 Jun 2025 02:01 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Jagannath Mandir Mystery: पुरी के जगन्नाथ मंदिर के ऊपर पक्षियों का न उड़ना अब भी एक अनसुलझा रहस्य है, जिसे श्रद्धालु ईश्वर की दिव्य लीला मानते हैं। यह रहस्य मंदिर की आध्यात्मिक महिमा और अद्वितीयता को और गहराता है।
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पुरी जगन्नाथ मंदिर - फोटो : पीटीआई
Jagannath Temple Unbelievable Mystery : भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत में कुछ पर्व ऐसे हैं जो केवल उत्सव नहीं, ईश्वर से सीधा जुड़ाव महसूस कराते हैं। पुरी की श्री जगन्नाथ रथ यात्रा ऐसा ही एक अद्भुत पर्व है, जहाँ भगवान खुद अपने रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण करते हैं और भक्तों को अपने दर्शन का सौभाग्य देते हैं। हर साल आषाढ़ मास में होने वाली यह यात्रा करोड़ों भक्तों की आस्था का प्रतीक है। रथ यात्रा में तीन विशाल रथों पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी विराजते हैं, और मंदिर से निकलकर गुंडिचा मंदिर तक की यात्रा करते हैं। इस दौरान पूरे पुरी शहर में भक्ति, उल्लास और भव्यता की लहर दौड़ जाती है।
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लेकिन इस रथ यात्रा से जुड़ा एक रहस्य ऐसा भी है जो न सिर्फ भक्तों को, बल्कि वैज्ञानिकों को भी हैरान करता है। वह यह कि पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर के ऊपर से कोई पक्षी नहीं उड़ता, न ही कोई विमान उस क्षेत्र से गुजरता है। इस रहस्य को लेकर दो तरह की मान्यताएं हैं।धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ देव स्वयं मंदिर की रक्षा करते हैं। पक्षियों के राजा होने के नाते, उनके क्षेत्र में कोई और पक्षी प्रवेश नहीं करता। यह सम्मान या भय का प्रतीक माना जाता है। वहीं वैज्ञानिकों का मानना है कि मंदिर की ऊँचाई, बनावट और समुद्र के पास होने की वजह से यहां की वायु की गति कुछ ऐसी है कि पक्षियों के लिए इस क्षेत्र में उड़ान भरना कठिन हो जाता है। जो भी कारण हो, यह रहस्य आज भी बना हुआ है। पुरी का यह मंदिर श्रद्धा और रहस्य का अद्भुत मेल है, और रथ यात्रा उस ईश्वर की यात्रा है जो अपने भक्तों के पास खुद चलकर आता है।
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गरुड़ देव की उपस्थिति - फोटो : adobe stock
गरुड़ देव की उपस्थिति
पुरी के श्रद्धालुओं और संतों के अनुसार, भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ देव, जो पक्षियों के राजा माने जाते हैं, स्वयं मंदिर की रक्षा करते हैं। जब गरुड़ देव जैसे शक्तिशाली देवता मंदिर की सुरक्षा में तैनात हों, तो बाकी पक्षी उनके क्षेत्र में प्रवेश नहीं करते या तो सम्मान में या फिर आत्मिक भयवश। यह मान्यता केवल एक पौराणिक कथा भर नहीं है, बल्कि कई भक्तों के लिए यह भगवान जगन्नाथ की दिव्यता और गरुड़ की महानता का प्रमाण है। कहा जाता है कि जब प्रभु का वाहन स्वयं निगरानी कर रहा हो, तो कोई अन्य उड़ने वाला जीव उस क्षेत्र में उड़ान नहीं भर सकता।
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दिव्यता का चमत्कार या अदृश्य शक्ति?
दिव्यता का चमत्कार या अदृश्य शक्ति?
बहुत से लोग मानते हैं कि मंदिर और उसका वातावरण एक दैवीय नो-फ्लाई ज़ोन है। न कोई ड्रोन, न पक्षी, और न ही हवाई जहाज कोई भी मंदिर के ऊपर से उड़ान नहीं भरता। यहां  की ऊर्जा इतनी पवित्र और गूढ़ मानी जाती है कि यह सामान्य जीवों के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती। पुरी तटवर्ती शहर है, जहां सागर की लहरें मंदिर के पास तक आती हैं। समुद्र से उठती तेज हवाएं इस क्षेत्र को एक विशिष्ट वायुमंडलीय प्रभाव भी प्रदान करती हैं, जिसे कुछ लोग चमत्कारी हवाएं भी कहते हैं।

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जगन्नाथ रथ यात्रा - फोटो : Adobe Stock
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
वैज्ञानिक इस पर अपनी राय रखते हैं लेकिन वह आस्था से भिन्न है। करीब 214 फीट ऊंची जगन्नाथ मंदिर की संरचना, एक विशेष बेलनाकार और विशाल डिज़ाइन में निर्मित है। इसके कारण इसके ऊपर की हवा एक सामान्य दिशा में न बहकर, अत्यधिक तेज़ और जटिल बन जाती है। कुछ वैज्ञानिक इसे कार्मान वोर्टेक्स स्ट्रीट नामक भौतिक सिद्धांत से जोड़ते हैं, जिसमें किसी बड़ी वस्तु के चारों ओर हवा की ऐसी लहरें बनती हैं जो संतुलन बिगाड़ देती हैं। इस स्थिति में किसी पक्षी के लिए इतनी ऊंचाई पर स्थिर उड़ान भरना या दिशा नियंत्रित करना कठिन हो सकता है। इस तरह, मंदिर का विशाल आकार, ऊँचाई और स्थान  मिलकर हवा को कुछ इस तरह प्रभावित करते हैं कि वहां पक्षी उड़ान नहीं भर पाते।
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जगन्नाथ रथ यात्रा - फोटो : Adobe Stock
हवाई जहाज क्यों नहीं उड़ते मंदिर के ऊपर से?
अब बात आती है विमानों की। असल में, पुरी शहर किसी भी प्रमुख एविएशन रूट पर नहीं आता। नजदीकी एयरपोर्ट भुवनेश्वर है, और हवाई मार्ग आमतौर पर वहां से अन्य बड़े शहरों की ओर निकलते हैं। इसलिए यहां से कोई विमान रूट नहीं गुजरता, और यह पूरी तरह एक भौगोलिक संयोग हो सकता है। इसके अलावा, मंदिर के शिखर पर स्थित नीलचक्र जो आठ पवित्र धातुओं (अष्टधातु) से बना है, जिसको लेकर एक अफवाह है कि यह सिग्नल्स या रेडियो वेव्स में बाधा डाल सकता है। हालांकि इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है, पर यह धारणा अब भी लोगों के बीच प्रचलित है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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