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Holi 2025: होलिका दहन आज, जानें इस दिन भद्रा की स्थिति

Thu, 13 Mar 2025 06:26 AM IST
ज्योति मेहरा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भद्रा में होलिका दहन करना अशुभ माना जाता है। इस कारण होलिका दहन का समय निर्धारित करने से पहले भद्रा समाप्त होने का इंतजार किया जाता है।
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holika - फोटो : Amar Ujala
Holi 2025: होली का पर्व पूरे भारत में उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है। यह सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि सामाजिक और धार्मिक दृष्टि से भी इसका विशेष महत्व है। इस दिन लोग एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर अपनी खुशियों को साझा करते हैं और घरों में पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं।

होली और होलिका दहन का महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार होली का त्योहार फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन से पहले होलिका दहन किया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। धार्मिक मान्यता के अनुसार होलिका दहन करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
 

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holi 2025 - फोटो : Amar Ujala
पूर्णिमा तिथि और होलिका दहन का शुभ समय
ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस वर्ष फाल्गुन पूर्णिमा तिथि 13 मार्च को सुबह 10:35 बजे शुरू होगी और 14 मार्च को सुबह 12:23 बजे तक रहेगी। चूंकि हिंदू धर्म में उदया तिथि को महत्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए पूर्णिमा तिथि का प्रभाव 14 मार्च को भी रहेगा।
 

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होलिका दहन पर रहेगा भद्रा का साया - फोटो : amar ujala
होलिका दहन पर रहेगा भद्रा का साया
हर साल होलिका दहन के दिन भद्रा काल का विशेष ध्यान रखा जाता है, क्योंकि मान्यता है कि भद्रा में होलिका दहन करना अशुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार भद्रा काल के दौरान किए गए शुभ कार्यों का नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस कारण होलिका दहन का समय निर्धारित करने से पहले भद्रा समाप्त होने का इंतजार किया जाता है।

 

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होलिका दहन पर रहेगा भद्रा का साया - फोटो : adobe stock
इस वर्ष भी होलिका दहन के दिन भद्रा का प्रभाव रहेगा। ज्योतिष गणना के अनुसार भद्रा काल 13 मार्च को रात 10:30 बजे समाप्त होगा। इसीलिए 13 मार्च को रात 11:26 बजे से 12:30 बजे तक का समय होलिका दहन के लिए शुभ रहने वाला है। होलिका दहन के लिए यह शुभ अवधि 01 घण्टा 04 मिनट्स के लिए रहने वाली है। 
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होलिका दहन का महत्व - फोटो : adobe stock
होलिका दहन का महत्व
होलिका दहन से नकारात्मक ऊर्जा और बुरी शक्तियां समाप्त हो जाती हैं, जिससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। इस के दौरान आग की परिक्रमा करने और उसमें नारियल, गेहूं व अन्य चीजें अर्पित करने से घर-परिवार की रक्षा होती है। होलिका की अग्नि से निकलने वाली ऊर्जा वातावरण को शुद्ध करती है, जिससे कई बीमारियों से बचाव होता है।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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