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Hariyali Teej 2026: आज हरियाली तीज पर बन रहे 2 अति शुभ योग, जानें पूजा का मुहूर्त, विधि और धार्मिक महत्व

Sat, 15 Aug 2026 09:20 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Hariyali Teej Puja VIdhi: आज यानी 15 अगस्त को मनाए जाने वाले इस पर्व पर शिव योग और सिद्ध योग का शुभ संयोग बन रहा है। मान्यता है कि इस दौरान शिव-पार्वती की पूजा करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। आइए जानते हैं हरियाली तीज की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।
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Hariyali Teej 2026 - फोटो : अमर उजाला AI

Hariyali Teej Puja Vidhi: आज यानि 15 अगस्त 2026 को हरियाली तीज का पर्व  मनाया जा रहा है। खास बात यह है कि इस बार तीज के दिन शिव योग और सिद्ध योग जैसे शुभ संयोग बन रहे हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार इन शुभ योगों में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। हरियाली तीज हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पवित्र मिलन का प्रतीक माना जाता है। सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाने वाली हरियाली तीज पर सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से व्रत रखती हैं। वहीं कुंवारी कन्याएं भी मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना से इस व्रत का पालन करती हैं।

 

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पंचांग के अनुसार हरियाली तीज के दिन शिव योग सुबह 7 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। - फोटो : Adobe stock
हरियाली तीज पर कब बनेंगे शुभ योग?
पंचांग के अनुसार हरियाली तीज के दिन शिव योग सुबह 7 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। इसके बाद सिद्ध योग शुरू हो जाएगा, जो अगले दिन सुबह 5 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। ऐसे में तीज के दिन पूजा-पाठ, मंत्र जाप और धार्मिक कार्यों के लिए विशेष समय रहेगा।
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हरियाली तीज 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त - फोटो : adobe stock
हरियाली तीज 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त
हरियाली तीज की तृतीया तिथि 14 अगस्त 2026 की शाम 6:46 बजे से शुरू होकर 15 अगस्त की शाम 5:28 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर हरियाली तीज का व्रत और पर्व 15 अगस्त को मनाया जाएगा।
  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:24 बजे से 5:07 बजे तक
  • प्रातः संध्या: सुबह 4:45 बजे से 5:50 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:59 बजे से दोपहर 12:52 बजे तक
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 2:37 बजे से 3:30 बजे तक
  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 7:01 बजे से 7:22 बजे तक
  • सायाह्न संध्या: शाम 7:01 बजे से रात 8:06 बजे तक
  • अमृत काल: रात 8:18 बजे से 9:53 बजे तक

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पूजा के लिए भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। - फोटो : adobe stock
हरियाली तीज पर ऐसे करें शिव-पार्वती की पूजा
  • हरियाली तीज के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • इसके बाद व्रत का संकल्प लेकर पूजा की तैयारी करें।
  • घर के पूजा स्थान को फूलों और अन्य सजावटी सामग्री से सजा सकते हैं।
  • पूजा के लिए भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। 
  • सबसे पहले भगवान गणेश का ध्यान और पूजन करें।
  • इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती का आवाहन करें।
  • शिवलिंग पर जल और अपनी श्रद्धानुसार पंचामृत अर्पित करें।
  • भगवान शिव को बेलपत्र, फूल और अन्य पूजन सामग्री चढ़ाएं।
  • माता पार्वती को सुहाग की सामग्री, फूल और वस्त्र अर्पित करें।
  • शिव-पार्वती के मंत्रों का जाप करें और हरियाली तीज की कथा सुनें या पढ़ें।
  • फल और मिठाई का भोग लगाएं।
  • अंत में शिव-पार्वती की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
  • पूजा के बाद अपनी श्रद्धा के अनुसार जरूरतमंदों को दान देना भी शुभ माना जाता है।
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हरियाली तीज पर हरे रंग का क्यों है विशेष महत्व?
हरियाली तीज पर हरे रंग का क्यों है विशेष महत्व?
हरियाली तीज का पर्व सावन की हरियाली और प्रकृति के सौंदर्य से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए इस दिन हरे रंग के वस्त्र पहनने और हरी चूड़ियां, मेहंदी तथा अन्य श्रृंगार सामग्री का इस्तेमाल करने की परंपरा कई क्षेत्रों में देखने को मिलती है। कई परिवारों में इस अवसर पर सास अपनी बहू को हरे कपड़े, चूड़ियां, मेहंदी, श्रृंगार का सामान, आभूषण और मिठाइयां उपहार में देती हैं। महिलाएं झूला झूलती हैं, तीज के लोकगीत गाती हैं और एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं देती हैं।
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हरियाली तीज का धार्मिक महत्व - फोटो : संवाद

हरियाली तीज का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। लंबे समय तक तप करने के बाद भगवान शिव ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें स्वीकार किया। इसी कारण हरियाली तीज को शिव और पार्वती के मिलन से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत और शिव-पार्वती की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और दांपत्य सौहार्द की कामना पूरी होती है। हालांकि व्रत और पूजा की परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में भिन्न हो सकती हैं। इस बार हरियाली तीज पर बनने वाले शिव योग और सिद्ध योग पर्व की धार्मिक महत्ता को और खास बना रहे हैं। ऐसे में श्रद्धालु अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना कर सकते हैं।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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