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Hariyali Amavasya 2025: हरियाली अमावस्या आज, जानें शुभ मुहूर्त , दान का महत्व और उपाय

Thu, 24 Jul 2025 07:09 AM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Hariyali Amavasya: सावन मास को भगवान शिव का प्रिय महीना माना जाता है, और इसी माह की हरियाली अमावस्या भी धार्मिक अनुष्ठानों में विशेष स्थान रखती है। आइए विस्तार से जानते हैं इस विशेष तिथि के शुभ समय और महत्व के बारे में।
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हरियाली अमावस्या 2025 - फोटो : amar ujala
Hariyali Amavasya Significance: हरियाली अमावस्या, जिसे सावन अमावस्या भी कहा जाता है, सावन मास की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पावन तिथि है। यह अमावस्या सावन की शिवरात्रि के ठीक अगले दिन आती है, इसलिए इसका आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। हिंदू धर्म में अमावस्या को विशेष रूप से पितृ तर्पण और नवग्रह शांति के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण कर्म किए जाते हैं, जिससे पितृओं की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार में समृद्धि का वास होता है।
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सावन मास को भगवान शिव का प्रिय महीना माना जाता है, और इसी माह की हरियाली अमावस्या भी धार्मिक अनुष्ठानों में विशेष स्थान रखती है। इस दिन नदी, तालाब या जलाशयों के किनारे जाकर पितरों का तर्पण किया जाता है, जिससे पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और जीवन में खुशहाली आती है। इसके अलावा नवग्रह शांति पूजा भी इस दिन की महत्ता को और बढ़ा देती है, जो ग्रहों की अशुभताओं को कम करने में मदद करती है। इस बार सावन मास की हरियाली अमावस्या कब मनाई जाएगी, इसका शुभ मुहूर्त क्या है और इस पावन दिन के अन्य धार्मिक महत्व क्या हैं, यह जानना हर हिंदू परिवार के लिए जरूरी है ताकि वे अपने धार्मिक कर्म सही समय पर विधिपूर्वक कर सकें और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो सके। आइए विस्तार से जानते हैं इस विशेष तिथि के शुभ समय और महत्व के बारे में।
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हरियाली अमावस्या 2025 - फोटो : अमर उजाला
हरियाली अमावस्या का शुभ मुहूर्त
सावन मास की अमावस्या तिथि आरंभ:  24 जुलाई , प्रातः 2:29 बजे से
सावन मास की अमावस्या तिथि समाप्त: 25 जुलाई , रात्रि  12:41 बजे
उदया तिथि के अनुसार, 24 जुलाई को हरियाली अमावस्या मनाई जाएगी।
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शुभ योग
शुभ योग
  • गुरु पुष्य योग: यह योग ज्ञान, समृद्धि और धार्मिक प्रगति का संकेत है।
  • सर्वार्थ सिद्धि योग: यह योग सभी प्रकार के कार्यों में सफलता और सिद्धि का योग होता है।
  • अमृत सिद्धि योग: यह योग स्वास्थ्य, दीर्घायु और समृद्धि लाने वाला योग माना जाता है।

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हरियाली अमावस्या का महत्व
हरियाली अमावस्या का महत्व
सावन मास का समय अपने आप में बहुत खास होता है क्योंकि इस दौरान चारों तरफ हरियाली छा जाती है। बारिश की वजह से मौसम खुशनुमा और सुहावना हो जाता है, जिससे पेड़-पौधों में ताजगी और जीवन की नयी चमक देखने को मिलती है। इसी कारण से सावन की अमावस्या को हरियाली अमावस्या के नाम से जाना जाता है। इस पावन दिन का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बहुत बड़ा है। सबसे पहले तो इस दिन पितरों की पूजा और तर्पण करना अत्यंत शुभ माना जाता है, जिससे पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। साथ ही, नवग्रह शांति पूजा भी इस दिन विशेष रूप से की जाती है, जिससे ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है।
इसके अलावा, सावन मास शिव भगवान का प्रिय महीना होता है, इसलिए हरियाली अमावस्या के दिन शिव पूजा का भी विशेष महत्व है। इस दिन भगवान शिव की आराधना से मन की शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है। प्रकृति की रक्षा और पर्यावरण की सेवा के लिए भी इस दिन पौधे लगाने की बहुत अहमियत होती है। खासकर आम, आंवला, नीम, बरगद, पीपल जैसे पवित्र और लाभकारी पेड़ लगाना शुभ माना जाता है। ये पौधे न केवल पर्यावरण को स्वस्थ बनाते हैं, बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी बेहद पवित्र माने जाते हैं। इसलिए हरियाली अमावस्या न केवल एक धार्मिक अवसर है, बल्कि प्रकृति के साथ जुड़ने और उसका संरक्षण करने का भी एक अनमोल मौका है। इस दिन किए गए पूजा-पाठ और पौधारोपण से जीवन में खुशहाली, स्वास्थ्य और सौभाग्य आता है।
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हरियाली अमावस्या का महत्व
हरियाली अमावस्या के दिन किए जाने वाले उपाय
  • इस दिन पवित्र नदी या जलाशय में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि नदी में स्नान संभव न हो, तो नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इससे शारीरिक और मानसिक शुद्धि होती है।
  • स्नान के बाद ध्यान लगाना और अपने ईष्टदेव का स्मरण करना चाहिए। इससे मन को शांति मिलती है और आध्यात्मिक उन्नति होती है।
  • शिवजी का विशेष पूजन करें। भगवान शिव को आक, मदार जैसे फूल चढ़ाना बहुत लाभकारी माना जाता है। इस दिन शिव पूजन से विषम परिस्थितियों में भी सफलता मिलती है।
  • पितरों की पूजा और तर्पण करना जरूरी है। इससे पितृदोष का निवारण होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
  • जरूरतमंदों को भोजन कराना और दान-पुण्य करना अत्यंत शुभ फलदायक होता है। इससे पुण्य की वृद्धि होती है और जीवन में समृद्धि आती है।
  • पीपल के पेड़ की पूजा करें और साथ ही फलदार पौधे लगाने का भी विशेष महत्व है। ये पेड़ जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाते हैं और पर्यावरण की सुरक्षा करते हैं।
  • घर के मुख्य द्वार पर घी का दिया जलाएं। यह घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और नकारात्मक शक्तियों को दूर रखता है।


 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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