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Navratri Kalash Sthapana: शारदीय नवरात्रि के पहले दिन कैसे करें कलश स्थापना ? जानिए पूजा के नियम और महत्व

Thu, 03 Oct 2024 05:50 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

कलश स्थापना को शुभता और मंगल का प्रतीक माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार कलश में जल को ब्रह्मांड की सभी सकारात्मक ऊर्जाओं का स्रोत माना गया है। इसे देवी दुर्गा की शक्ति और सृजन की प्रतीकात्मक उपस्थिति माना जाता है।
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शारदीय नवरात्रि कलश स्थापना - फोटो : अमर उजाला
Happy Shardiya Navratri 2024 Kalash Sthapana Timing: आदिशक्ति की आराधना का पर्व शारदीय नवरात्रि आज से प्रारंभ हो गया है। सनातन धर्म में नवरात्रि विशेष धार्मिक महत्व रखने वाला पर्व है, जिसे शक्ति की देवी दुर्गा की उपासना के रूप में मनाया जाता है। नवरात्रि के प्रथम दिन 'कलश स्थापना' का विशेष महत्व होता है, क्योंकि यह पूरे नौ दिनों की पूजा का प्रारंभिक और महत्वपूर्ण संस्कार है। इस दिन कलश स्थापित कर देवी दुर्गा का आह्वान किया जाता है, जिससे शुभता, समृद्धि और सुख की प्राप्ति होती है।

कलश स्थापना का महत्व

कलश स्थापना को शुभता और मंगल का प्रतीक माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार कलश में जल को ब्रह्मांड की सभी सकारात्मक ऊर्जाओं का स्रोत माना गया है। इसे देवी दुर्गा की शक्ति और सृजन की प्रतीकात्मक उपस्थिति माना जाता है। कलश स्थापना के साथ ही देवी के नौ रूपों का आवाहन किया जाता है और यह नौ दिन तक चली पूजा का मुख्य केंद्र होता है। यह विधि नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करने और घर में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखने का साधन माना जाता है। कलश स्थापना के साथ देवी दुर्गा की पूजा आरंभ होती है और यह पूजा साधक के मन और घर को पवित्र करने का माध्यम होती है।  

नवरात्रि कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

पहला शुभ मुहूर्त- गुरुवार, 3 अक्तूबर को सुबह 6 बजकर 15 मिनट से लेकर सुबह 7 बजकर 22 मिनट तक रहेगा।

दूसरा शुभ मुहूर्त-  गुरुवार, 3 अक्तूबर को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 46 मिनट लेकर 12 बजकर 33 मिनट तक।

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शारदीय नवरात्रि 2024 - फोटो : अमर उजाला

कलश स्थापना के नियम

शुभ मुहूर्त का चयन

नवरात्रि के पहले दिन 'घट स्थापना' का मुहूर्त विशेष महत्व रखता है। इसे शुभ मुहूर्त में करना आवश्यक होता है, जो प्रायः सूर्योदय के समय या अभिजीत मुहूर्त में किया जाता है। शुभ मुहूर्त में की गई कलश स्थापना शुभ फलदायी मानी जाती है।

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नवरात्रि पर देवी दुर्गा की आराधना का महत्व - फोटो : अमर उजाला
पवित्र स्थान का चयन
कलश स्थापना के लिए पूजा स्थल का शुद्ध और स्वच्छ होना आवश्यक है। पूजा स्थल को गंगाजल या शुद्ध जल से पवित्र किया जाता है। फिर वहां एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर, उस पर कलश स्थापित किया जाता है।

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शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाएं - फोटो : Amar Ujala
कलश का पूजन
कलश के ऊपर आम के पत्ते रखे जाते हैं और उसके ऊपर नारियल को लाल कपड़े में लपेट कर बांधा जाता है। इसे फिर कलश पर रखा जाता है। कलश में गंगाजल या स्वच्छ जल भरा जाता है और उसमें सुपारी, सिक्के, अक्षत (चावल) और दूर्वा आदि डालकर विधिवत पूजा की जाती है। इसे देवी के निवास के रूप में स्थापित किया जाता है।
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navratri 2024 - फोटो : अमर उजाला
जौ बोना
कलश स्थापना के साथ जौ बोने की परंपरा भी होती है। जौ को प्रतीकात्मक रूप से सुख, समृद्धि और उर्वरता का प्रतीक माना जाता है। इसे मिट्टी के पात्र में बोया जाता है और इसके बढ़ने को शुभ संकेत माना जाता है।
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Shardiya Navratri 2024 - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
सप्त जल की धार
कुछ परंपराओं में सप्त जल धाराओं का उपयोग करके कलश में जल भरा जाता है, जिसमें गंगा, यमुना, सरस्वती, गोदावरी, नर्मदा, सिंधु और कावेरी का जल सम्मिलित किया जाता है। यदि यह संभव न हो तो गंगाजल का उपयोग भी पर्याप्त माना जाता है।
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शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाएं - फोटो : Amar Ujala Graphics
कलश की दिशा और स्थान
कलश को उत्तर-पूर्व दिशा में स्थापित करना शुभ माना जाता है। इसे घर के पूजा स्थल में रखा जाता है और पूजा के दौरान इसे स्थिर रखा जाता है।
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Shardiya Navratri 2024 - फोटो : अमर उजाला
कलश स्थापना के बाद की पूजा
कलश स्थापना के बाद नौ दिनों तक देवी दुर्गा की पूजा की जाती है। प्रतिदिन देवी के एक रूप की पूजा होती है और साधक नियमपूर्वक व्रत, ध्यान और आराधना करता है। नौ दिनों की पूजा के बाद दशमी के दिन 'विजयादशमी' के पर्व पर कलश विसर्जन किया जाता है।

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