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Hanuman Janmotsav 2026: 1 या 2 अप्रैल कब है हनुमान जन्मोत्सव ? जानें डेट और शुभ मुहूर्त

Sat, 28 Mar 2026 08:00 AM IST
Megha Kumari ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

Hanuman Janmotsav 2026: हनुमान जयंती हिंदू धर्म का प्रमुख पर्व है, जिसपर भक्त व्रत, भजन, कीर्तन और सुंदरकांड का पाठ करते हैं। मान्यता है कि, हनुमान जन्मोत्सव पर पूजा-पाठ करने से प्रभु की विशेष कृपा मिलती हैं।
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Hanuman Janmotsav 2026 - फोटो : adobe stock
Hanuman Janmotsav 2026: हर साल चैत्र शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर हनुमान जयंती मनाई जाती हैं, जिसे हनुमान जन्मोत्सव भी कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार, बजरंगबली अमर हैं और वह आज भी अपने भक्तों की रक्षा के लिए सशरीर पृथ्वी पर मौजूद हैं। इसलिए यह दिन उनके जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस शुभ मौके पर देशभर के हनुमान मंदिरों में पूजा-पाठ का भव्य आयोजन किया जाता है। साथ ही प्रभु की कृपा पाने के लिए सिंदूर, बूंदी, चोला और बेसन के लड्डू का भोग लगाया जाता है। इससे साधक के मन से सभी भय, कष्ट, बाधाएं और नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती हैं। यही नहीं जीवन में साहस, शक्ति व आत्मविश्वास का संचार भी होता है। ऐसे में साल 2026 में हनुमान जयंती किस दिन मनाई जाएगी, आइए जानते हैं।
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Kab Hai Hanuman Jayanti - फोटो : adobe stock
कब है हनुमान जन्मोत्सव 2026 ?
  • पंचांग के अनुसार, इस साल चैत्र शुक्ल की पूर्णिमा तिथि 1 अप्रैल 2026 को सुबह 7 बजकर 6 मिनट पर शुरू होगी। 
  • इस तिथि का समापन 2 अप्रैल 2026 को सुबह 7 बजकर 41 पर हो रहा है। 
  • उदया तिथि के मुताबिक, हनुमान जन्मोत्सव का पर्व 2 अप्रैल 2026 को मनाया जाएगा
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Kab Hai Hanuman Jayanti - फोटो : adobe stock
शुभ योग
इस साल हनुमान जन्मोत्सव के दिन हस्त नक्षत्र बन रहा है, जो शाम 5 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा ध्रुव योग का शुभ संयोग भी इस तिथि पर रहने वाला है। हालांकि, यह दिन ज्योतिष दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस दिन मंगल का मीन राशि में गोचर होगा। बता दें, मंगल ग्रह हनुमान जी से जुड़ा होता है। इसलिए यह दुर्लभ योग बेहद लाभकारी हो सकता है। 

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Kab Hai Hanuman Jayanti - फोटो : adobe stock
पूजा विधि
  • पूजा के लिए सबसे पहले एक चौकी पर लाल रंग का साफ नया वस्त्र बिछाएं।
  • अब उसपर हनुमान जी की मुर्ति स्थापित करें।
  • सबस पहले प्रभु को सिंदूर और फूलों की माला अर्पित करें।
  • इसके बाद धूप-दीप जलाएं और बूंदी का भोग लगाएं।
  • इस दौरान बेसन के लड्डुओं का भोग भी लगाना शुभ होता है, इससे प्रभु प्रसन्न होते हैं।
  • इसके पश्चात श्रद्धा भाव से हनुमान चालीसा का पाठ करें।
  • अब आप गुड़-चना और पान का बीड़ा चढ़ाएं।
  • अंत में आरती करें और सभी में प्रसाद बांट दें।
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Kab Hai Hanuman Jayanti - फोटो : adobe stock
हनुमान जी के मंत्र

1. ओम नमो भगवते हनुमते नम:
2. ओम हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट
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Kab Hai Hanuman Jayanti - फोटो : adobe

हनुमान जी की आरती 

आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।

जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके।

अंजनि पुत्र महाबलदायी। संतान के प्रभु सदा सहाई।।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।

दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारी सिया सुधि लाए।
लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।

लंका जारि असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे।
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।आनि संजीवन प्राण उबारे।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।

पैठी पाताल तोरि जमकारे। अहिरावण की भुजा उखारे।
बाएं भुजा असुरदल मारे। दाहिने भुजा संत जन तारे।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।

सुर-नर-मुनि जन आरती उतारें। जय जय जय हनुमान उचारें।
कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।

लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई। तुलसीदास प्रभु कीरति गाई।
जो हनुमानजी की आरती गावै। बसी बैकुंठ परमपद पावै।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

 

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