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Guru Pradosh Vrat 2024: पांच अद्भुत संयोग में प्रदोष व्रत, इस विधि से करें महादेव की पूजा

Tue, 26 Nov 2024 12:49 PM IST
मेघा कुमारी ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

Guru Pradosh Vrat 2024: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए रखा जाता है। 
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Guru Pradosh Vrat 2024 - फोटो : अमर उजाला
Guru Pradosh Vrat 2024: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन शिव परिवार की आराधना करने से मनचाहा वर पाने की कामना पूर्ण होती है। इतना ही नहीं वैवाहिक जीवन में भी सुख-समृद्धि बनी रहती है। महादेव जल्द प्रसन्न होने वाले देवता है। यदि सच्चे भाव से प्रदोष व्रत पर उन्हें एक लोटा जल चढ़ाया जाए तो वह सभी का कल्याण करते हैं।

वैसे तो हर माह की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत किया जाता है। लेकिन इनमें मार्गशीर्ष माह के व्रत को बेहद खास माना जा रहा है। ज्योतिष गणना के अनुसार इस साल मार्गशीर्ष माह में प्रदोष व्रत 28 नवंबर 2024 को रखा जाएगा। इस दिन कई अद्भुत संयोग बन रहे हैं, जिनमें पूजा करना बेहद शुभ है। ऐसे में आइए इन शुभ योग के बारे में जानते हैं।
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Guru Pradosh Vrat 2024 - फोटो : freepik
प्रदोष व्रत तिथि
मार्गशीर्ष मास कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरूआत 28 नवंबर 2024 को सुबह 06:23 पर होगी। यह तिथि 29 नवंबर को सुबह 09:43 पर समाप्त होगी।
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Guru Pradosh Vrat 2024 - फोटो : freepik
शुभ योग
पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष माह में 28 नवंबर 2024 को प्रदोष व्रत रखा जाएगा। इस दिन गुरुवार होने के कारण यह गुरु प्रदोष व्रत कहलाएगा। इस तिथि पर सौभाग्य योग बन रहा है, जो शाम 4 बजकर 1 मिनट तक रहेगा। इसके बाद शोभन योग का निर्माण हो रहा है, जो अगले दिन यानी 29 नवंबर 2024 को शाम 4:33 मिनट तक रहेगा। ज्योतिष गणना के अनुसार प्रदोष व्रत पर गर और वणिज करण बन रहे है, जिस पर चित्रा नक्षत्र का संयोग रहेगा। इस योग में पूजा करना बेहद कल्याणकारी माना जाता है।

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Guru Pradosh Vrat 2024 - फोटो : freepik
पूजा विधि
  • प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा प्रदोष काल में की जाती है।
  • इस दौरान पूजा के लिए सर्वप्रथम एक चौकी लें।
  • इसपर लाल रंग या किसी अन्य साफ वस्त्र को बिछाएं।
  • फिर महादेव और देवी पार्वती की तस्वीर को स्थापित कर लें।
  • अब शिवलिंग का शहद, घी और गंगाजल से अभिषेक करें।
  • इसके बाद फूल, बेलपत्र और भांग अर्पित करते जाएं।
  • महादेव के मंत्रों का जप करते हुए दीया और धूपबत्ती जलाएं।
  • फिर शिव चालीसा का पाठ करें।
  • अंत में आरती करें और पूजा में हुई भूल चूक की क्षमा मांगे। 
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Guru Pradosh Vrat 2024 - फोटो : freepik
शिवलिंग पर जल चढ़ाने का मंत्र

मन्दाकिन्यास्तु यद्वारि सर्वपापहरं शुभम् ।

तदिदं कल्पितं देव स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम् ॥

श्रीभगवते साम्बशिवाय नमः । स्नानीयं जलं समर्पयामि।
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Guru Pradosh Vrat 2024 - फोटो : freepik
शिव जी की आरती 
ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्द्धांगी धारा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसानन गरूड़ासन
वृषवाहन साजे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
मधु कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
पर्वत सोहें पार्वतू, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
जया में गंग बहत है, गल मुण्ड माला।
शेषनाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवान्छित फल पावे।।
ओम जय शिव ओंकारा।। ओम जय शिव ओंकारा।।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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