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Gita Jayanti 2024: किस दिन मनाई जाती है गीता जयंती? जानें इसकी तिथि और महत्व

Tue, 26 Nov 2024 07:04 AM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भगवद्गीता को सनातन धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र ग्रंथ माना गया है। केवल यही एक ग्रंथ है जिसकी जयंती मनाई जाती है। ऐसे में आइए जानते हैं इस साल जीता जयंती किस दिन मनाई जाएगी।
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गीता जयंती 2024 - फोटो : Amar Ujala
Gita Jayanti 2024: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को भगवद्गीता का दिव्य ज्ञान प्रदान किया था। इस ऐतिहासिक घटना के उपलक्ष्य में हर वर्ष गीता जयंती मनाई जाती है। भगवद्गीता को सनातन धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र ग्रंथ माना गया है। केवल यही एक ग्रंथ है जिसकी जयंती मनाई जाती है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण ने जीवन की तमाम समस्याओं का समाधान बताया है। महाभारत के युद्ध से पूर्व अर्जुन जब मानसिक दुविधाओं और नैतिक प्रश्नों से जूझ रहे थे, तब भगवान कृष्ण ने उन्हें गीता का उपदेश देकर उनका मार्गदर्शन किया था। ऐसे में आइए जानते हैं इस साल जीता जयंती किस दिन मनाई जाएगी।
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गीता जयंती 2024 की तिथि और समय - फोटो : adobe stock
गीता जयंती 2024 की तिथि और समय
हर साल मार्गशीर्ष महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को गीता जयंती मनाई जाती है, जिसे मोक्षदा एकादशी भी कहा जाता है, मनाई जाएगी।
एकादशी तिथि का प्रारंभ- 11 दिसंबर 2024 को सुबह 03:42 बजे
एकादशी तिथि का समापन- 12 दिसंबर 2024 को सुबह 01:09 बजे
उदयातिथि के अनुसार, गीता जयंती 11 दिसंबर 2024 को मनाई जाएगी।
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गीता जयंती पूजा विधि - फोटो : adobe stock
गीता जयंती पूजा विधि
  • गीता जयंती के दिन प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करते हुए उनकी पूजा विधि पूर्वक करें।
  • सूर्य देव को जल अर्पित करें।
  • श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र पर चंदन, फूल और दीपक अर्पित करें।
  • भगवद्गीता के ग्रंथ पर चंदन और तिलक लगाकर उसका पूजन करें।
  • गीता के श्लोकों का पाठ करें और गीता की आरती करें।

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गीता जयंती का महत्व - फोटो : adobe stock
गीता जयंती का महत्व
गीता जयंती का पर्व भगवद्गीता के दिव्य संदेश को याद करने और आत्मसात करने का दिन है। यह दिन मोक्षदा एकादशी के रूप में भी मनाया जाता है। कुरुक्षेत्र के युद्ध भूमि में अर्जुन को दिए गए श्रीकृष्ण के उपदेश न केवल उनके लिए बल्कि समस्त मानवता के लिए प्रेरणादायक हैं। गीता के 18 अध्यायों में जीवन के हर क्षेत्र में सफलता पाने के मार्ग बताए गए हैं।
 
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गीता का प्रमुख संदेश - फोटो : adobe stock
गीता का प्रमुख संदेश

गीता के श्लोककर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥

अर्थ: मनुष्य को अपने कर्तव्यों का पालन बिना फल की इच्छा के करना चाहिए।

क्रोधाद्भवति संमोह: संमोहात्स्मृतिविभ्रम:।
स्मृतिभ्रंशाद्बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति॥

अर्थ: क्रोध से भ्रम उत्पन्न होता है, जिससे स्मृति नष्ट हो जाती है, और अंततः मनुष्य का पतन हो जाता है।


 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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