गीता का प्रमुख संदेश
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गीता का प्रमुख संदेश
गीता के श्लोककर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
अर्थ: मनुष्य को अपने कर्तव्यों का पालन बिना फल की इच्छा के करना चाहिए।
क्रोधाद्भवति संमोह: संमोहात्स्मृतिविभ्रम:।
स्मृतिभ्रंशाद्बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति॥
अर्थ: क्रोध से भ्रम उत्पन्न होता है, जिससे स्मृति नष्ट हो जाती है, और अंततः मनुष्य का पतन हो जाता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।