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Gupt Navratri 2026: आज से शुरू आषाढ़ गुप्त नवरात्रि, जानें घटस्थापना मुहूर्त और गृहस्थ लोगों के लिए पूजा विधि

Wed, 15 Jul 2026 11:40 AM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Ashadha Gupt Navratri 2026: आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई, बुधवार से शुरू होकर 23 जुलाई, गुरुवार तक चलेगी। यह साधना विशेष रूप से तांत्रिकों के लिए महत्वपूर्ण होती है, लेकिन गृहस्थ भी नियमों का पालन करते हुए इसका लाभ ले सकते हैं। आइए जानते हैं गृहस्थ लोगों के लिए इसके नियम और पूजा विधि क्या है...
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10 महाविद्याओं की साधना और पूजा की सही विधि - फोटो : AI
Gupt Navratri 2026: हिंदू धर्म में मां शक्ति की आराधना के लिए नवरात्रि को अत्यंत पवित्र पर्व माना जाता है। यह त्योहार वर्ष में चार बार मनाया जाता है, जिसमें दो नवरात्रि सार्वजनिक रूप से मनाई जाती हैं और दो गुप्त रूप में होती हैं। चैत्र और शारदीय नवरात्रि को प्रकट नवरात्रि कहा जाता है, जिन्हें पूरे देश में उत्साह के साथ मनाया जाता है। वहीं माघ और आषाढ़ मास में आने वाली नवरात्रि को ‘गुप्त नवरात्रि’ के नाम से जाना जाता है।

पंचांग के अनुसार, साल 2026 में आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई, बुधवार यानी आज से शुरू होकर 23 जुलाई, गुरुवार तक चलेगी। तांत्रिक शास्त्रों जैसे मेरु तंत्र और डामर तंत्र में इन दिनों को विशेष साधना के लिए श्रेष्ठ बताया गया है। इन्हें ‘साधना की रात्रियां’ भी कहा जाता है, क्योंकि इस दौरान बाहरी दिखावे की बजाय व्यक्तिगत और गोपनीय साधना को अधिक महत्व दिया जाता है। जहां सामान्य नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है, वहीं गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की आराधना की जाती है। यह साधना विशेष रूप से तांत्रिकों के लिए महत्वपूर्ण होती है, लेकिन गृहस्थ भी नियमों का पालन करते हुए इसका लाभ ले सकते हैं।
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गुप्त नवरात्रि 2026 घटस्थापना मुहूर्त - फोटो : freepik
गुप्त नवरात्रि 2026 घटस्थापना मुहूर्त
  • इस वर्ष आषाढ़ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि यानी 15 जुलाई 2026 को घटस्थापना के साथ इस पर्व की शुरुआत होगी। 
  • कलश स्थापना का शुभ समय प्रातः 05:33 बजे से 10:09 बजे तक रहेगा। 
  • नवमी तिथि 23 जुलाई को पड़ेगी, जो इस पर्व का समापन दिन होगा।
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कलश स्थापना और पूजा विधि - फोटो : adobe stock
कलश स्थापना और पूजा विधि
अगर कोई व्यक्ति जटिल तांत्रिक विधियों का पालन नहीं करना चाहता, तो वह सरल तरीके से घर पर भी पूजा कर सकता है। इसके लिए सुबह स्नान के बाद घर के ईशान कोण को साफ करके वहां एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं और मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करें। एक पात्र में मिट्टी डालकर उसमें जौ बोएं। इसके बाद तांबे या मिट्टी के कलश में जल, अक्षत, सुपारी और सिक्का डालें, आम के पत्ते लगाएं और ऊपर नारियल रखकर उसे स्थापित करें। फिर दीपक जलाकर मां से अपनी मनोकामना का संकल्प लें।

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गृहस्थ लोगों के लिए पूजा के नियम - फोटो : adobe stock
गृहस्थ लोगों के लिए पूजा के नियम
गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की पूजा की जाती है, जिनमें काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला शामिल हैं। इनमें से गृहस्थ जीवन जीने वालों के लिए मां कमला, मां मातंगी और मां भुवनेश्वरी की साधना को सरल और शुभ माना गया है। बाकी उग्र साधनाएं बिना गुरु के मार्गदर्शन के नहीं करनी चाहिए।

10 महाविद्याओं की साधना 
तंत्र शास्त्र में साधना को गोपनीय रखना बहुत जरूरी माना गया है। एक सिद्धांत के अनुसार, पूजा और मंत्र जप पूरी तरह गुप्त रहना चाहिए। मान्यता है कि जितनी अधिक गोपनीयता रखी जाती है, उतना ही शीघ्र और प्रभावी फल प्राप्त होता है। साधना के लिए मध्य रात्रि का समय विशेष रूप से अनुकूल माना गया है।
 
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इन बातों का रखें ध्यान - फोटो : adobe stock
इन बातों का रखें ध्यान
गुप्त नवरात्रि के दौरान विशेष सावधानियां भी रखनी चाहिए। इस समय की जाने वाली साधनाएं सामान्य भक्ति से अलग होती हैं और इनके लिए कठोर नियमों का पालन जरूरी होता है। इन नौ दिनों में ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए, सादगी से जीवन जीना चाहिए और जमीन पर सोना श्रेष्ठ माना गया है। साथ ही, प्याज, लहसुन, मांस और शराब जैसे तामसिक पदार्थों से दूरी बनानी चाहिए। बिना गुरु की अनुमति के किसी भी तांत्रिक मंत्र का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
 
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कैसे करें पूजा? - फोटो : freepik
कैसे करें पूजा?
जो लोग सरल भक्ति मार्ग अपनाना चाहते हैं, वे गुप्त नवरात्रि के पहले दिन से दुर्गा सप्तशती का पाठ या ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे’ मंत्र का मानसिक जप शुरू कर सकते हैं। यह एक सुरक्षित और प्रभावी उपाय है, जिससे जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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