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Gudi padwa 2021: 13 अप्रैल को है गुड़ी पड़वा, जानिए इस पर्व से जुड़ी 10 रोचक बातें

Thu, 08 Apr 2021 07:14 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Gudi Padwa 2021 - फोटो : अमर उजाला
Gudi padwa 2021:  सनातन धर्म में चैत्र का महीना बहुत ही पवित्र और महत्वपूर्ण माना गया है। चैत्र का महीना हिंदू कैलेंडर का पहला महीना होता है। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि हिंदू नववर्ष का पहला दिन होता है। इसी तिथि से चैत्र नवरात्रि का प्रारंभ भी होता है। 13 अप्रैल से हिंदू नववर्ष नव संवत्सर 2078 का आरंभ होगा, इसी दिन गुड़ी पड़वा का पर्व भी मनाया जाता है। मराठी समुदाय के लिए गुड़ी पड़वा का विशेष महत्व होता है। यह पूरे महाराष्ट्र में धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। दक्षिण भारत में इस पर्व को उगादी नाम से जाना जाता है। हिन्दू नववर्ष के शुभारंभ की खुशी में मनाया जाने वाला गुड़ी पड़वा के बारे में आइए जानते है कुछ खास बातें...
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gudi
1. गुड़ी पड़वा विशेष रूप से महाराष्ट्र में मनाया जाता है। इसमें 'गुड़ी' शब्द का अर्थ 'विजय पताका' और पड़वा का अर्थ प्रतिपदा तिथि। गुड़ी पड़वा पर्व के मौक पर प्रत्येक घर में विजय के प्रतीक स्वरूप गुड़ी सजाई जाती है।
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gudi
2. इस पर्व से जुड़ी एक मान्यता है कि इसी दिन शालिवाहन नाम के एक कुम्हार-पुत्र ने मिट्टी के सैनिकों की सेना से अपने शत्रुओं पर विजय पाई थी। यही कारण है कि इसी दिन शालिवाहन शक का प्रारंभ भी होता है।

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gudi
3. गुड़ी पड़वा के दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी। मान्यता यह भी है कि इसी दिन से सतयुग की शुरुआत हुई थी।
 
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lord ram
4.पौराणिक कथाओं से जुड़ी मान्यता है कि गुड़ी पड़वा के दिन ही प्रभु श्रीराम ने बालि का वध कर दक्षिण भारत में रहने वाले लोगों को उसके आतंक से मुक्त करवाया था। इसके बाद यहां की प्रजा ने खुश होकर अपने घरों में विजय पताका फहराई थी। जिसे गुड़ी कहा जाता है।
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Happy Navratri 2021
5. चैत्र नवरात्रि के पहले दिन ही आदिशक्ति का प्राकट्य हुआ था। कहते हैं कि इसी दिन गणितज्ञ भास्कराचार्य ने तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित पंचांग की रचना भी की थी। 
 
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गुड़ी पडवा
6.गुड़ी पड़वा को गोवा और केरल में कोंकणी समुदाय संवत्सर पड़वो के नाम से मनाते हैं। जबकि कर्नाटक में यह पर्व युगादि के नाम से मनाया जाता है। इसी तरह आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में उगादी के नाम से मनाया जाता है।

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hindu new year 2021 - फोटो : अमर उजाला
7. गुड़ी पड़वा को उगादि (युगादि) भी कहा जाता है। युगादि युग और आदि शब्द से मिलकर बना है। यह पर्व आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में विशेष रूप से मनाया जाता है। इस दिन यहां के घरों में 'पच्चड़ी/प्रसादम्' बांटा जाता है। मान्यता है कि इस प्रसाद के सेवन से व्यक्ति साल भर निरोगी रहता है।

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8. महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा के दिन पूरन पोली या फिर कहें मीठी रोटी बनाई जाती है। पूरन पोली में गुड़ जीवन में मिठास, नीम के फूल जीवन की कड़वाहट को दूर करने, इमली और कच्चे आम को जीवन से जुड़े खट्टे-मीठे अनुभव की के रुप में अंगीकार करते हुए बनाया जाता है। इसी पावन पर्व के दिन से ही यहां के लोग आम का सेवन करना प्रारंभ करते हैं।

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भगवान सूर्य - फोटो : Social media
9. गुड़ी पड़वा के दिन प्रत्यक्ष देवता सूर्य, अर्घ्य, ध्वजा पूजन, पूरपोली, नीम की पत्तियों आदि का विशेष महत्व होता है। इस पावन पर्व पर लोग सूर्य देव से सुख-समृद्धि एवं आरोग्य की कामना करते हैं।   
 
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gudi padwa
10. गुड़ी पड़वा के दिन लोग सुबह स्नान-ध्यान के पश्चात् पारंपरिक वस्त्र पहनकर पूजन करते हैं। मराठी महिलाएं जहां नौवारी यानी 9 गज लंबी साड़ी पहनती हैं तो वहीं पुरुष लाल या केसरिया पगड़ी के साथ कुर्ता-धोती या पैजापा पहनता है। उत्तर भारत में चैत्र नवरात्रि के शुभारंभ से घरों की विशेष सफाई की तरह महाराष्ट्र में भी गुड़ी पड़वा के दिन लोग अपने घरों की विशेष रूप से सफाई करते हैं। इस दिन प्रत्यक्ष देवता सूर्य के पूजन के बाद गुड़ी यानी विजय पताका के विशेष पूजन का विधान है। इस शुभ पर्व पर मंगल कामना करते हुए लोग अपने घरों को रंगोली, फूलों और वंदनवार से सजाते हैं।
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