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Gangaur Aarti Lyrics: ईसर म्हारा छैल छबीला, गोरा म्हारी रूप की रानी...गणगौर पूजा के लिए पढ़ें आरती लिरिक्स

Sat, 21 Mar 2026 11:25 AM IST
Shweta Singh धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Gangaur Aarti Lyrics: आज चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया को गणगौर पर्व मनाया जा रहा है। यह पर्व विवाहित महिलाओं को उनके पतियों की लंबी उम्र का आशीर्वाद देने वाला और अविवाहित महिलाओं को एक योग्य वर पाने की कृपा प्रदान करने वाला माना जाता है।
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गणगौर आरती - फोटो : amar ujala
Gangaur Aarti Lyrics: आज चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया को गणगौर पर्व मनाया जा रहा है। यह पर्व विवाहित महिलाओं को उनके पतियों की लंबी उम्र का आशीर्वाद देने वाला और अविवाहित महिलाओं को एक योग्य वर पाने की कृपा प्रदान करने वाला माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन देवी गौरी अपने माता-पिता के घर आती हैं, और उसके बाद भगवान शिव उन्हें वापस ले जाने के लिए आते हैं। इस दिन मिट्टी से बनी भगवान शिव और देवी गौरी की मूर्तियों की,  रीति-रिवाजों के साथ पूजा की जाती है। शास्त्रों के अनुसार बिना आरती के कोई भी पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती। यहां पढ़ें गणगौर आरती के लिरिक्स।  
 
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गणगौर पूजा आरती-1  - फोटो : अमर उजाला
गणगौर पूजा आरती-1 

म्हारी डूंगर चढती सी बेलन जी,
म्हारी मालण फुलडा से लाय। 
सूरज जी थाको आरत्यों जी,
चन्द्रमा जी थाको आरत्यो जी। 
ब्रह्मा जी थाको आरत्यो जी,
ईसर जी थाको आरत्यो जी।
थाका आरतिया में आदर मेलु पादर मेलू,
पान की पचास मेलू।
पीली पीली मोहरा मेलू , रुपया मेलू,
डेड सौ सुपारी मेलू , मोतीडा रा आखा मेलू।
राजा जी रो सुवो मेलू , राणी जी री कोयल मेलू,
करो न भाया की बहना आरत्यो जी।
करो न सायब की गौरी आरत्यो जी।।

 
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गणगौर पूजा की आरती-2  - फोटो : adobe stock
गणगौर पूजा की आरती-2 

नीव ढलती बेलड़ी जी,
मालन फुलड़ा सा ल्याय, ईसरदास थारो कोटडया जी,
मालन फुलड़ा सा ल्याय, कानीराम थारो आरती जी।
आरतडदात धाम सुपारी लागी डोड़ा स जी,
डोड़ा राज कोट चिणाए, झीलो म्हारी चूनड़ी जी।
गायां जाई छ ठाणम जी, बहुवां जाई छ साल, झीलो म्हारी चूनड़ी जी,
गायां जाया बाछड़ा जी, बहूवां जाया छ पूत, झीलो म्हारी चूनड़ी जी।
गायां खाया खोपरा जी बहूवां खाई छ सूट, झीलो म्हारी चूनड़ी जी,
गायां क गल घूघरा जी बहूवां कागल हार, झीलो म्हारी चूनड़ी जी।
गोरल जायो द पूत जी कुण खिलायगी जी, खिलासी रोवां ननद झाबर क पालण जी,
आँख मोड़ नाक मोड़ कड़ मोड़ घूमर घाल,बाड़ी न रुन्दल जी।
बाड़ी म लाल किवाड़, झीली म्हारी चूनड़ी जी, आवगा ब्रह्मदासजी रा पूत पाजोव थारी मन राली जी।

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गणगौर पूजा आरती -3  - फोटो : adobe stock

गणगौर पूजा आरती -3 

आरती कीजिए गणगौर ईसर जी की
गौरी शंकर शिव पार्वती की 

देसी घी को दीप जलायो
तोड़ तोड़ फूलडा हार बनायो
लाला फूला की थाने हार पहनायो
आरती कीजिए...

महिमा थारी सब कोई गावे
खीर ढोकला को भोग लगावे
भंडार उसके भर देते हो
आरती कीजिए...

ईसर म्हारा छैल छबीला
गोरा म्हारी रूप की रानी
सुंदर जोड़ी पर वारी वारी जाऊं
आरती कीजिए...

जो कोई आपकी शरण में आवे
सर्व सुहाग परम पथ पावे
आरती कीजिए...

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माता पार्वती जी की आरती  - फोटो : अमर उजाला

माता पार्वती जी की आरती 
 
जय पार्वती माता जय पार्वती माता
ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल कदा दाता।
 
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता
 
जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुण गाता।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
सिंह को वाहन साजे कुंडल है साथा
देव वधु जहं गावत नृत्य कर ताथा।
 
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
सतयुग शील सुसुन्दर नाम सती कहलाता
 
हेमांचल घर जन्मी सखियन रंगराता।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

शुम्भ निशुम्भ विदारे हेमांचल स्याता
सहस भुजा तनु धरिके चक्र लियो हाथा।
 
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
सृष्टि रूप तुही जननी शिव संग रंगराता
 
नंदी भृंगी बीन लाही सारा मदमाता।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
 
देवन अरज करत हम चित को लाता
गावत दे दे ताली मन में रंगराता।
 
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
श्री प्रताप आरती मैया की जो कोई गाता
 
सदा सुखी रहता सुख संपति पाता।
जय पार्वती माता मैया जय पार्वती माता।


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