एक कथा है कि नंद बाबा के गौशाला में ढेर सारी गाएं थीं। इन्हीं गायों में कामधेनु की वंशज बहुला नाम की धर्म परायण गाय भी थी। एक बार भगवान श्रीकृष्ण ने परायण गाय की परीक्षा लेने के बारे में सोची। बहुला एक दिन चरते हुए अपने झुंड से बिछड़ गई। इस दौरान श्रीकृष्ण ने सिंह बनकर बहुला को घेर लिया और उस पर आक्रमण करने का प्रयास किया। बहुला ने अपनी जान को संकट में देख शेर से निवेदन किया कि आज उसे ना मारे क्योंकि वह अपने छोटे से बछड़े से आखिरी बार मिलना चाहती है। उसका बछड़ा भूखा होगा और उसे आकिरी बार दूध पिलाकर वह कल खुद ही उसके पास चली आएगी। शेर ने बहुला की बात मान ली।
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