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Mangla Gauri Vrat 2026: सावन के पहले मंगला गौरी व्रत पर बन रहे हैं 3 शुभ योग, जानें व्रत के नियम और मुहूर्त

Thu, 30 Jul 2026 12:57 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Pehla Mangla Gauri Vrat 2026: इस वर्ष सावन के पहले मंगला गौरी व्रत पर तीन शुभ योगों का संयोग बन रहा है, जो इसे और भी खास बना देता है। इस व्रत से जुड़े कुछ विशेष नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करना शुभ माना जाता है।
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कब है पहला मंगला गौरी व्रत? - फोटो : AI
Pehla Mangla Gauri Vrat 2026 Date: सावन मास के प्रत्येक मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है। इस दिन मां गौरी के साथ भगवान शिव और विघ्नहर्ता श्री गणेश की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस वर्ष सावन के पहले मंगला गौरी व्रत पर तीन शुभ योगों का संयोग बन रहा है, जो इसे और भी खास बना देता है। जिन नवविवाहित महिलाओं का यह पहला सावन है, उनके लिए इस व्रत से जुड़े कुछ विशेष नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करना शुभ माना जाता है।
 
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कब है पहला मंगला गौरी व्रत? - फोटो : freepik
कब है पहला मंगला गौरी व्रत?
साल 2026 में सावन का पहला मंगला गौरी व्रत 4 अगस्त को पड़ेगा। पंचांग के अनुसार इस दिन सावन माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि रहेगी, जो रात 10:03 बजे तक प्रभावी होगी।

शुभ योग
इस दिन तीन शुभ योगों का निर्माण हो रहा है, सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और रवि योग। ये सभी योग रात 9:54 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन 5 अगस्त की सुबह 5:45 बजे तक रहेंगे। वहीं दिन के समय धृति योग सुबह से लेकर शाम 7:33 बजे तक रहेगा, इसके बाद शूल योग प्रारंभ होगा। नक्षत्रों की बात करें तो रेवती नक्षत्र सुबह से रात 9:54 बजे तक रहेगा, जिसके बाद अश्विनी नक्षत्र शुरू होगा।
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पूजा का शुभ समय - फोटो : Amar Ujala
पूजा का शुभ समय
पूजा के लिए शुभ समय की बात करें तो इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:20 बजे से 5:02 बजे तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से 12:54 बजे तक है। सामान्य रूप से पूजा का उपयुक्त समय सुबह 9:06 बजे से दोपहर 2:08 बजे के बीच रहेगा। सूर्यास्त शाम 7:10 बजे होगा, इसलिए जिन स्थानों पर प्रदोष काल में पूजा की परंपरा है, वे सूर्यास्त के बाद पूजा कर सकते हैं।

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मंगला गौरी व्रत के नियम - फोटो : Amar Ujala
मंगला गौरी व्रत के नियम
नवविवाहित महिलाओं के लिए मंगला गौरी व्रत से जुड़े विशेष नियम भी हैं। परंपरा के अनुसार, विवाह के बाद पहला सावन होने पर यह व्रत मायके में रखा जाता है। इसके बाद अगले चार वर्षों तक इसे ससुराल में करना चाहिए। कुल मिलाकर इस व्रत को लगातार पांच वर्षों तक करना शुभ माना गया है।

भद्रा और पंचक का साया
पहले मंगला गौरी व्रत के दिन भद्रा और पंचक का भी संयोग रहेगा। भद्रा रात 10:03 बजे से शुरू होकर अगले दिन सुबह 5:45 बजे तक रहेगी, लेकिन इसका प्रभाव स्वर्ग लोक में होने के कारण अशुभ नहीं माना जाएगा। वहीं पंचक सुबह 5:44 बजे से रात 9:54 बजे तक रहेगा, जिसे चोर पंचक कहा जाता है। इस दौरान अपने कीमती सामान की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
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मंगला गौरी व्रत का महत्व - फोटो : Adobe stock
मंगला गौरी व्रत का महत्व
मंगला गौरी व्रत का धार्मिक महत्व अत्यंत विशेष है। इसे करने से सुहागन महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है और पति की आयु में वृद्धि होती है। साथ ही वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और परिवार में समृद्धि आती है। वहीं जिन कन्याओं का विवाह नहीं हो पाया है या जिनके विवाह में बाधाएं आ रही हैं, उनके लिए भी यह व्रत अत्यंत फलदायी माना जाता है और शीघ्र विवाह के योग बनने लगते हैं।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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