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Eid Al Adha 2020: जानिए ईद-उल-जुहा से जुड़ी खास बातें, क्यों और कैसे मनाया जाता है बकरीद का त्योहार

Fri, 31 Jul 2020 12:20 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
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bakrid mubarak 2020
बकरीद जिसे बकरा ईद या ईद उल अजहा भी कहते हैं मुस्लिम समाज का बड़ा त्योहार है। पूरे विश्व के मुस्लिम समुदाय ईद उल अजहा को त्याग और बलिदान का त्योहार मनाते है। बकरीद का त्योहार मुसलमानों के लिए दूसरी बड़ी ईद है।  ईद-उल-फित्र रमजान महीने के उपवास की अवधि के समाप्त होने पर मनाया जाता है जबकि, बकरीद वार्षिक हज यात्रा के समापन के लिए जाना जाता है। ईद-उल-जुहा का चांद जिस दिन नजर आता है उसके 10वें दिन बकरीद मनाई जाती है। ईद उल अजहा पर ही पैगंबर हजरत इब्राहिम ने अल्लाह के आदेश का पालन करते हुए अपने बेटे इस्माइल की कुर्बानी दी थी। बकरीद के मौके पर आइए जानते हैं इससे जुड़ी हुई कुछ खास बातें...
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बकरीद - फोटो : amar ujala
माना जाता है कि बकरीद का त्योहार पैगंबर हजरत इब्राहिम ने अपने बेटे इस्माइल की कुर्बानी देकर अल्लाह के आदेश का पालन करते हुए की थी। हजरत इब्राहिम हमेशा लोगों के सेवा और खुदा का इबादत में लगे रहते हैं। 90 वर्ष की आयु में उन्हें एक बेटा हुआ जिसका नाम उन्होंने इस्माइल रखा।
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बकरीद - फोटो : amar ujala
एक दिन हजरत इब्राहिम के सपने में अल्लाह ने आकर उनसे अपनी सभी प्रिय चीजों की कुर्बानी देने का आदेश सुनाया। तब अल्लाह के आदेश को मानते हुए उन्होंने सभी प्रिय चीजों की कुर्बानी देने शुरू कर दी। फिर एक दिन दोबारा हजरत इब्राहिम के सपने में अल्लाह ने सबसे प्रिय चीज की कुर्बानी देने को कहा तब इब्राहिम ने अपने बेटे की कुर्बानी देने के लिए तैयार हो गए।

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बकरीद - फोटो : amar ujala
तब अपने प्रिय बेटे की कुर्बानी के लिए उन्होंने आंखों पर पट्टी बांधकर कुर्बानी दी। लेकिन जैसे ही उन्होंने आंखों से पट्टी खोली तब उन्हें अपना बेटा इस्माइल जीवित दिखा और कुर्बानी की जगह पर एक दुम्बा दिखा। तभी से कहा जाता है कि बकरीद पर कुर्बानी की परंपरा की शुरुआत हुई।
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बकरीद - फोटो : amar ujala
बकरीद पर मुस्लिम समुदाय के लोग एक साथ मस्जिद में अल सुबह की नमाज अदा करते हैं। इसके बाद बकरे की कुर्बानी दी जाती है। कुर्बानी के गोश्त को तीन हिस्सों में बांटा जाता है। एक हिस्सा गरीबों, दूसरा रिश्तेदारों और तीसरी हिस्सा अपने लिए रखा जाता है।
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बकरीद - फोटो : amar ujala
बकरीद पर कुर्बानी वही लोग दे सकते हैं जिनके पास 52 तोला चांदी हो या इतने ही मूल्य का पैसा उनके पास हो। जिन लोगों के पास पहले से कर्ज है तो उसके लिए कुर्बानी जरूरी नहीं है। ऐसे जानवर की कुर्बानी नहीं दी जाती जिसको शारीरिक रूप से बीमारी है या शरीर का कोई हिस्सा ठीक नहीं है। 
 
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