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Dussehra 2025: क्या है रावण के 10 सिरों का राज ? जानें किन बुराइयों के हैं ये प्रतीक

Wed, 01 Oct 2025 04:22 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Symbolism of Ravan’s 10 Heads: धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक रावण शास्त्रों का ज्ञाता था और उसके 10 सिर उसकी शक्ति को दर्शाते थे। परंतु क्या आप रावण के इन सिरों के प्रतीकों को जानते हैं अगर नहीं, तो आइए जानते हैं।
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विजयादशमी आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर मनाई जाती है, जिसे दशहरा भी कहते है। - फोटो : Adobe Stock
Dussehra 2025: विजयादशमी आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर मनाई जाती है, जिसे दशहरा भी कहते है। इस वर्ष 2 अक्तूबर, 2025 को दशहरा है। मान्यता है कि इस दिन भगवान राम ने रावण का वध कर अधर्म पर धर्म की स्थापना की थी। इसलिए इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना गया है। यही कारण है कि दशहरा के विशेष अवसर पर देशभर में रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतलों का दहन किया जाता है। धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक रावण शास्त्रों का ज्ञाता था और उसके 10 सिर उसकी शक्ति को दर्शाते थे। परंतु क्या आप रावण के इन सिरों के प्रतीकों को जानते हैं अगर नहीं, तो आइए जानते हैं।
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रावण का पहला सिर उसकी अनियंत्रित इच्छाओं को दर्शाता है, जिसे उसकी हार का कारण भी माना गया है। - फोटो : Adobe
रावण के दस सिर किन बुराईयों के हैं प्रतीक 

काम 
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रावण का पहला सिर उसकी अनियंत्रित इच्छाओं को दर्शाता है, जिसे उसकी हार का कारण भी माना गया है।

क्रोध 
ऐसा माना जाता है कि रावण का दूसरा सिर क्रोध को दर्शाता है। रावण का गुस्सा इतना अधिक था कि वह बिना किसी विचार विमर्श के काम करते थे और क्रोध के चलते सभी हदों को भी पार कर देते थे।
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रावण का तीसरा सिर लोभ का प्रतीक है। रावण के मन में इस संसार की हर वस्तुओं को पाने का लालच था - फोटो : Adobe Stock
लोभ
मान्यता है कि रावण का तीसरा सिर लोभ का प्रतीक है। रावण के मन में इस संसार की हर वस्तुओं को पाने का लालच था और वह सभी चीजों पर अपना अधिकार पाना चाहते थे।

मोह 
रावण का चौथा सिर मोह का माना जाता है। उन्हें अपनी शक्ति और संपत्ति से अधिक मोह था, जिसके चलते सही और गलत की पहचान भी खो दी थी।

अहंकार 
रावण का पांचवां सिर अहंकार को दर्शाता है, जिसे उनका सबसे बड़ा शत्रु माना गया है। 

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पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक रावण का सातवां सिर ईर्ष्या को दर्शाता है। - फोटो : Adobe Stock
मद 
मान्यता है कि रावण का छठा सिर मद को दर्शाता है यानी उन्हें अपने वैभव पर अत्यधिक गर्व था, जिसे उनकी हार का कारण भी माना जाता है।

ईर्ष्या 
पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक रावण का सातवां सिर ईर्ष्या को दर्शाता है। कहते हैं कि रावण दूसरों की सफलता और अच्छाई को देखकर उसके मन में ईर्ष्या भर जाती थी।

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रावण का नौवां सिर द्वेष को दर्शाता है , जो उनके मन को प्रतिशोध की भावना से भर देता था। - फोटो : Adobe Stock
चिंता 
रावण का आठवां सिर चिंता का प्रतीक है, जिस कारण उनका मन अशांत रहता था।

द्वेष
रावण का नौवां सिर द्वेष को दर्शाता है , जो उनके मन को प्रतिशोध की भावना से भर देता था।

अज्ञान 
रावण का दसवां और आखिरी सिर अज्ञान का प्रतीक है, जो उसे धर्म-सत्य के मार्ग से भटका कर विनाश की ओर ले जाता था।


 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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