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दशहरा 2017: बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है विजयादशमी, आज ऐसे करें पूजा

Sat, 30 Sep 2017 10:14 AM IST
amarujala.com- Presented by: विनोद शुक्ला
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आज पूरे देश में विजयदशमी का पर्व मनाया जा रहा है। हिन्दू धर्म में दशहरा का विशेष महत्व है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि के खत्म होने बाद दशमी तिथि पर यह पर्व पूरे देश में पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है। दशहरे के दिन लोगों अस्‍त्र शस्‍त्र की भी पूजा करते हैं और इसी के साथ दीवापली की तैयारी शुरू हो जाती है।

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पौराणिक कथाओं के अनुसार जब भगवान 14 वर्षों के वनवास में थे तो लंकापति रावण ने उनकी पत्नी माता सीता का अपहरण कर उन्हें लंका की अशोक वाटिका में बंदी बना कर रखा लिया था। श्रीराम ने अपने छोटे भाई लक्ष्मण, भक्त हनुमान और वानर सेना के साथ रावण की सेना से लंका में ही पूरे नौ दिनों तक युद्ध लड़ा। मान्यता है कि उस समय प्रभु राम ने देवी माँ की उपासना की थी और उनके आशीर्वाद से आश्विन मास की दशमी तिथि पर अहंकारी रावण का वध किया था।
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एक दूसरी कथा के अनुसार असुरों के राजा महिषासुर ने अपनी शक्ति के बल पर देवताओं को पराजित कर इन्द्रलोक सहित पृथ्वी पर अपना अधिकार कर लिया था। भगवान ब्रह्रा के दिए वरदान के कारण किसी भी कोई भी देवता उसका वध नहीं कर सकते थे। ऐसे में त्रिदेवों सहित सभी देवताओं ने अपनी शक्तियों से देवी दुर्गा की उत्पत्ति की। इसके बाद देवी ने महिषासुर के आंतक से सभी को मुक्त करवाया। मां की इस विजय को ही विजय दशमी के नाम से मनाया जाता है।
 
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दशमी तिथि 29 सितंबर को रा‌त्रि 11 बजकर 49 मिनट से शुरू हो जाएगी और 1 अक्टूबर को रात्रि 1 बजकर 35 मिनट तक रहेगी।  इस दिन विजय मुहूर्त 47 मिनट का रहेगा। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 8 मिनट से 2 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा अपरान्ह पूजा का समय दोपहर 1 बजकर 21 मिनट से 3 बजकर 42 मिनट तक रहेगा।
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आज दशहरा के पूजन के लिए आटे से या गाय के गोबर से दस गोले यानि गोबर के कंडे बनाए और नवरात्रि के दौरान बोएं गए जौं को कंडे पर उन्हें लगा दे। इसके बाद धूप और दीप जलाकर कलम,शस्त्र, शास्त्र और पुस्तक की भी पूजन करें।
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