फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इस कारण से छोटी दिवाली की रात घर के मुख्य द्वार पर जलाया जाता है दीपक 

Fri, 18 Oct 2019 08:30 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

अमावस्या की रात चांद नहीं दिखाई पड़ता है और चांद ना निकलने की वजह से कही भटक ना जाएं इसके लिए एक बड़ा दीपक घर के मुख्य द्वार पर जलाया जाता है।
विज्ञापन
1 of 4
छोटी दिवाली यानि नरक चतुर्दशी वाले दिन घर के बाहर दीया जलाकर यमराज की पूजा की जाती है। आखिर क्यों दिवाली के मौके पर मृत्यु के देवता यमराज की पूजा का चलन है। इससे जुड़ी दो पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं।
विज्ञापन

2 of 4
पहली कथा
अमूमन छोटी दिवाली अमावस्या की रात को पड़ती है और अमावस्या तिथि के स्वामी यमराज होते हैं। अमावस्या की रात चांद नहीं दिखाई पड़ता है और चांद ना निकलने की वजह से कही भटक ना जाएं इसके लिए एक बड़ा दीपक घर के मुख्य द्वार पर जलाया जाता है।


 
विज्ञापन

3 of 4
दूसरी कथा
प्रचलित कथा के अनुसार रंति देव नाम के एक धर्मात्मा थे. उन्होंने अपने जीवन में कभी कोई पाप नहीं किया लेकिन फिर भी मृत्यु के दौरान उन्हें नरक लोक मिला यह देखकर राजा बोले कि मैंने कभी कोई पाप नहीं किया तो फिर आप क्यों मुझे लेने आए हो आपकेआने का मतलब मुझे नरक में स्थान मिला है। यह बात सुनकर यमदूत ने कहा कि हे वत्स एक बार आपके द्वार से एक ब्राह्मण भूखा पेट लौट गया था, यह आपके उसी कर्म का फल है। इस बात को सुन राजा ने यमराज से एक वर्ष का समय मांगा और ऋषियों के पास अपनी इस समस्या को लेकर पहुंचे तब ऋषियों ने उन्हें कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी का व्रत रखने और ब्राह्मणों को भोजन कराकर उनसे माफी मांगने को कहा। एक साल बाद यमदूत राजा को फिर लेने आए, इस बार उन्हें नरक के बजाय स्वर्ग लोक ले गए तब ही से कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष को दीप जलाने की परंपरा शुरू हुई। ताकि भूल से हुए पाप को भी क्षमादान मिल सके।
विज्ञापन

4 of 4
दीपक जलाने की विधि
घर के सबसे बड़े सदस्य को एक बड़ा दीया जलाना चाहिए।
इस दीये को पूरे घर में घुमाएं।
घर से बाहर जाकर दूर इस दीये को रख आएं। 
घर के दूसरे सदस्य घर के अंदर ही रहें और इस दीपक को न देखें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें