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स्नान और दीपदान का महीना है कार्तिक, जानिए इस माह के प्रमुख व्रत-त्योहार

Tue, 15 Oct 2019 12:00 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
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कार्तिक महीने का महत्व
हिंदी पंचाग का नया महीना कार्तिक शुरू हो चुका है। यह महीना सबसे पवित्र माना जाता है। कार्तिक महीना भगवान विष्णु का महीना है। इसी महीने में करीब चार महीनों के विश्राम के बाद देवउठनी एकादशी के दिन वे जागेंगे और एक बार फिर सृष्टि के संचालन की जिम्मेदारी अपने हाथों लेंगे। कार्तिक महीने में स्नान और दीपदान करने की परंपरा होती है। इस महीने दीपावली और छठ जैसे कई बड़े त्योहार मनाए जाएंगे। आइए जानते हैं कार्तिक महीने में कौन-कौन से और किस तारीख को विशेष त्योहार आएंगे।  
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Karwa Chauth - फोटो : Facebook
करवा चौथ
17 अक्टूबर

कार्तिक महीने के बड़े त्योहार के रूप में करवा चौथ पहला पर्व होगा। करवा चौथ सुहागिन महिलाओं का सबसे बड़ा पर्व होता है। इस पर्व पर महिलाएं पति की लंबी आयु और सौभाग्य के कामना के लिए करवा चौथ माता, भगवान शंकर और माता पार्वती की विशेष पूजा करती है। इस वे पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं। रात को चांद के दर्शन और उन्हें अर्ध्य देकर जल ग्रहण करती हैं।

करवा चौथ शुभ मुहूर्त
17:50:03 से 18:58:47 तक 
करवा चौथ चंद्रोदय समय 
20:15:59
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अहोई अष्टमी
अहोई अष्टमी 
21 अक्तूबर
कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन रखा जाने वाला व्रत अहोई अष्टमी कहलाता है। अहोई अष्टमी विवाहित महिलाएं अपनी संतानों के सुखमय जीवन एवं हर विपदा से उनकी रक्षा के लिए करती हैं। इस व्रत को लोकभाषा में अहोई आठें या करकाष्टमी भी कहा जाता है। अहोई का शाब्दिक अर्थ है-अनहोनी को होनी में बदलने वाली शुभ तिथि। अनहोनी को टालने वाली जगत जननी देवी पार्वती हैं, इसलिए इस दिन मां पार्वती की पूजा-अर्चना अहोई माता के स्वरूप में की जाती है। 

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एकादशी व्रत
रमा एकादशी व्रत
24 अक्तूबर

कार्तिक मास में दीपावली से पहले आने वाली एकादशी को रमा एकादशी कहते हैं। रमा एकादशी भगवान विष्णु की पत्नी लक्ष्मी जी के नाम पर है। जिन्हें रमा भी कहते हैं। इस पावन एकादशी के बारे में मान्यता है कि इस दिन उपवास रखने वाले पर भगवान विष्णु की कृपा बरसती है और उसे सभी सुखों की प्राप्ति होती है और वह सभी पापों से मुक्त होते हुए अंत में मोक्ष को प्राप्त करता है।
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शुभ धनतेरस - फोटो : अमर उजाला
पांच दिवसीय दीपोत्सव शुरू
धनतेरस
25 अक्टूबर

25 अक्तूबर से पांच दिनों का महापर्व दिवाली आरंभ हो जाएगा। पहले दिन यानी 25 अक्तूबर को धनतेरस है।कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार इस दिन धनवंतरी का जन्म हुआ था इसलिए इसे धनतेरस कहते हैं। धनवंतरी के जन्म के अलावा इस दिन माता लक्ष्मी और कुबेर की भी पूजा होती है। भगवान धनवंतरी समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए इस दिन बर्तन खरीदने की परंपरा है।

धनतेरस शुभ मुहूर्त 
शाम 19:10 से 20:15 तक 
प्रदोष काल
17:42 से 20:15 तक 
वृषभ काल
18:51 से 20:47 तक

 
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diwali
नरक चतुर्दशी
26 अक्टूबर

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी कहा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन मृत्यु के देवता यमराज की पूजा का विधान है। दिवाली से एक दिन पहले मनाए जाने की वजह से नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली भी कहा जाता है। इस दिन यमुना या किसी पवित्र नदी में स्नान का काफी महत्व है। मान्यता है कि नरक चतुर्दशी के दिन यमुना में स्नान करने से मनुष्य को यमलोक का दर्शन नहीं करना पड़ता। 
शुभ मुहूर्त
नरक चतुर्दशी
अभ्यंग स्नान समय 
05:15 से 06:29 तक
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goddess laxmi
महालक्ष्मी पूजा, दीपावली
27 अक्टूबर 

27 अक्टूबर को महालक्ष्मी की पूजा का महापर्व दीपावली है। इस रात देवी लक्ष्मी के साथ ही भगवान विष्णु का दक्षिणावर्ती शंख से अभिषेक करें। दीपावली की शाम को प्रदोषकाल के शुभ मुहूर्त में माता लक्ष्मी, भगवान गणेश के साथ माता सरस्वती, धन के देवता कुबेर और मां काली की पूजा होती है। 

दिवाली लक्ष्मी पूजा शुभ मुहूर्त
दीपावली और लक्ष्मी पूजा- रविवार, 27 अक्टूबर
लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त 
रात में 18:44 से 20:14 तक 
प्रदोष काल
17:40 से 20:14 तक 
वृषभ काल
18:44 से 20:39 तक

दीपावली महानिशीथ काल मुहूर्त
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त 
23:39 से 24:30 तक 
महानिशीथ काल 
23:39 से 24:30 तक 
सिंह काल
25:15:33 से 27:33:12 तक

 

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गोवर्धन पूजा
गोवर्धन पूजा
28 अक्टूबर

दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा की जाती है। कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर यह पर्व मनाया जाता है। गोवर्धन पूजा को अन्नकूट भी किया जाता है। इस त्योहार में भगवान कृष्ण के साथ गोवर्धन पर्वत और गायों की पूजा का विधान है। 
गोवर्धन पूजा शुभ मुहूर्त
सायंकाल मुहूर्त
15:25 से 17:39 तक

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भाई दूज
भाई दूज
29 अक्टूबर 

यह त्योहार भाई और बहन के प्रेम को समर्पित है। मान्यता है इस तिथि पर यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने आते हैं। 5 दिनों तक चलने वाले महापर्व का यह आखिरी पर्व होता है। भाई दूज में बहने अपने भाईयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी आरती उतारती हैं और उनकी लंबी आयु और अच्छे भविष्य की कामना करती हैं।
भाईदूज मुहूर्त
तिलक का समय
 13:11 से 15:25 तक

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गणेश भगवान - फोटो : अमर उजाला
विनायकी चतुर्थी
31 अक्टूबर
इस दिन गणेशजी की पूजा और  व्रत किया जाता है।
 

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छठ पर्व
2 नवंबर

छठ पर्व पर पवित्र नदियों में स्नान और सूर्य की विशेष पूजा करने की परंपरा है।
 

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आंवला नवमी 2019
अक्षय नवमी, आंवला नवमी
5 नवंबर

कार्तिक महीने की नवमी तिथि पर अक्षय नवमी जिसे आंवला नवमी भी कहते हैं मनाई जाएगी। इस दिन आंवले के पेड़ के नीचे बैठने और खाना खाने से कष्ट दूर हो जाते हैं। अक्षय नवमी का शास्त्रों में वही महत्व बताया गया है जो वैशाख मास की तृतीया का है। शास्त्रों के अनुसार अक्षय नवमी के दिन किया गया पुण्य कभी समाप्त नहीं होता है। इस दिन जो भी शुभ कार्य जैसे दान, पूजा, भक्ति, सेवा किया जाता है उनका पुण्य कई-कई जन्म तक प्राप्त होता है। 

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देवउठनी एकादशी 2019
देवउठनी एकादशी 
8 नवंबर

सभी 24 एकादशी में सबसे शुभ और मंगलकारी एकादशी कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की देवोत्थान एकादशी मानी जाती है। इस एकादशी को देवउठनी एकादशी, देवप्रबोधिनी एकादशी और डिठवन एकादशी भी कहते हैं। ऐसी मान्यता है इस दिन भगवान विष्णु जो पिछले 4 महीनों से क्षीर सागर में सोए हुए थें वह जागते हैं। भगवान के जागते ही 4 महीनों से रूके हुए सभी तरह के मांगलिक कार्य फिर से शुरू हो जाएंगे।
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कार्तिक पूर्णिमा
12 नवंबर

12 नवंबर को कार्तिक महीने की पूर्णिमा है इस दिन नदियों में स्नान और दीपदान करने की परंपरा है।
 
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