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छठ की छटा : अर्घ्य के साथ संपूर्ण हुई सूर्य की साधना, देखें देश भर में कैसे मनाया गया महापर्व

Wed, 14 Nov 2018 08:52 AM IST
धर्म डेस्क, अमर उजाला
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chhath puja - फोटो : PTI
लोक आस्था का छठ पर्व देश-दुनिया में पूरी निष्ठा और श्रद्धा के साथ सूर्य देवता को प्रात:कालीन अर्घ्य प्रदान करने के साथ संपन्न हुआ। देश भर में मनाए गए इस महापर्व पर श्रद्धा के विविध रंग देखने के लिए आगे की स्लाइड क्लिक करें —
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chhath puja - फोटो : PTI
छठ पर्व पर व्रती महिलाओं ने अपने परिवार के सुख और सौभाग्य की कामना लिए कुछ इस तरह की साधना-आराधना।
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chhath puja - फोटो : PTI
विश्व में एक मात्र देश भारत में डूबते सूर्य की भी साधना-अराधना बड़ी श्रद्धा और उल्लास के साथ की जाती है।

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chhath puja - फोटो : PTI
प्रत्यक्ष देव भगवान भास्कर की विशेष साधना का यह अनुपम लोकपर्व मुख्य रूप से पूर्वी भारत के बिहार, झारखण्ड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है।
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chhath puja - फोटो : PTI
मान्यता है कि इस महाअनुष्ठान के दौरान सच्चे मन से मांगी गई सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और इस पावन दिन भगवान भास्कर को अर्घ्य देने से इस जन्म के साथ-साथ, किसी भी जन्म में किए गए पाप नष्ट हो जाते हैं।
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chhath puja - फोटो : PTI
छठ के महापर्व में व्रती महिलाएं कठिन तप करते हुए भगवान सूर्यदेव से स्वयं एवं अपने परिजनों की मंगल कामना करती हैं।
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chhath puja - फोटो : PTI
छठ पर्व पर भगवान सूर्य की साधना कठिन तप के साथ की जाती है, इसलिए इसे महाव्रत भी कहते हैं।

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chhath puja - फोटो : PTI
इस पावन पर्व पर प्रत्यक्ष देवता सूर्य की साधना-आराधना के साथ छठी मैया की विशेष रूप से पूजा कर सुख-शांति-स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना की जाती है।

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chhath puja - फोटो : PTI
छठ पूजा के दौरान कठिन व्रत रखने वाली महिलाओं को ‘परवैतिन’ कहा जाता है, जो संतान के सुख सौभाग्य की कामना से छठी माई का व्रत रखती हैं।

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chhath puja - फोटो : PTI
इस पावन पर्व पर संध्याकालीन और प्रात:कालीन अर्घ्य का बहुत महत्व है, जिसके लिए महिलाएं झुंड का झुंड बनाकर छठ के पारंपरिक गीत गाती हुर्इं नदी किनारे पहुंचती हैं।
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chhath puja - फोटो : PTI
डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के पीछे ध्येय होता है कि — ‘हे सूर्य देव, आज शाम हम आपको आमंत्रित करते हैं कि कल प्रातःकाल का पूजन आप स्वीकार करें और हमारी मनोकामनाएं पूरी करें।
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