लोक आस्था का छठ पर्व देश-दुनिया में पूरी निष्ठा और श्रद्धा के साथ सूर्य देवता को प्रात:कालीन अर्घ्य प्रदान करने के साथ संपन्न हुआ। देश भर में मनाए गए इस महापर्व पर श्रद्धा के विविध रंग देखने के लिए आगे की स्लाइड क्लिक करें —
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chhath puja
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छठ पर्व पर व्रती महिलाओं ने अपने परिवार के सुख और सौभाग्य की कामना लिए कुछ इस तरह की साधना-आराधना।
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विश्व में एक मात्र देश भारत में डूबते सूर्य की भी साधना-अराधना बड़ी श्रद्धा और उल्लास के साथ की जाती है।
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प्रत्यक्ष देव भगवान भास्कर की विशेष साधना का यह अनुपम लोकपर्व मुख्य रूप से पूर्वी भारत के बिहार, झारखण्ड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है।
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मान्यता है कि इस महाअनुष्ठान के दौरान सच्चे मन से मांगी गई सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और इस पावन दिन भगवान भास्कर को अर्घ्य देने से इस जन्म के साथ-साथ, किसी भी जन्म में किए गए पाप नष्ट हो जाते हैं।
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छठ के महापर्व में व्रती महिलाएं कठिन तप करते हुए भगवान सूर्यदेव से स्वयं एवं अपने परिजनों की मंगल कामना करती हैं।
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छठ पर्व पर भगवान सूर्य की साधना कठिन तप के साथ की जाती है, इसलिए इसे महाव्रत भी कहते हैं।
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इस पावन पर्व पर प्रत्यक्ष देवता सूर्य की साधना-आराधना के साथ छठी मैया की विशेष रूप से पूजा कर सुख-शांति-स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना की जाती है।
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छठ पूजा के दौरान कठिन व्रत रखने वाली महिलाओं को ‘परवैतिन’ कहा जाता है, जो संतान के सुख सौभाग्य की कामना से छठी माई का व्रत रखती हैं।
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इस पावन पर्व पर संध्याकालीन और प्रात:कालीन अर्घ्य का बहुत महत्व है, जिसके लिए महिलाएं झुंड का झुंड बनाकर छठ के पारंपरिक गीत गाती हुर्इं नदी किनारे पहुंचती हैं।
डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के पीछे ध्येय होता है कि — ‘हे सूर्य देव, आज शाम हम आपको आमंत्रित करते हैं कि कल प्रातःकाल का पूजन आप स्वीकार करें और हमारी मनोकामनाएं पूरी करें।