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Chhath Puja Kharna 2025: छठ पूजा खरना आज, जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और महत्व

Sun, 26 Oct 2025 06:56 AM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Chhath Puja kharna 2025: छठ पर्व का दूसरा दिन खरना की परंपरा है। इस दिन व्रती सुबह स्नान कर व्रत की शुरुआत करते हैं और दिनभर निर्जला उपवास रखते हैं और विशेष प्रसाद तैयार करते हैं। आइए जानते हैं इस दिन के नियम और पूजा का शुभ समय...
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Chhath Puja 2025 Kharna - फोटो : Amar Ujala
Chhath Puja 2025 Kharna: छठ पूजा हिंदू धर्म के सबसे प्रमुख और पवित्र त्योहारों में से एक है, जिसे चार दिनों तक अत्यंत श्रद्धा, नियम और शुद्धता के साथ मनाया जाता है। यह पर्व सूर्य देव और छठी मैया की आराधना को समर्पित होता है। छठ पर्व का दूसरा दिन खरना या लोढ़ंडा के नाम से जाना जाएगा। इस साल यह 26 अक्तूबर 2025, रविवार यानी आज मनाया जाएगा। यह दिन व्रत, शुद्धता और भक्ति का प्रतीक माना जाता है, जब व्रती पूरी निष्ठा के साथ उपवास रखते हैं और विशेष प्रसाद तैयार करते हैं।

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खरना का धार्मिक महत्व - फोटो : Amar Ujala
खरना का महत्व
छठ पूजा का दूसरा दिन अत्यंत पवित्र माना गया है। इस दिन व्रती सुबह स्नान कर व्रत की शुरुआत करते हैं और दिनभर निर्जला उपवास रखते हैं। यह उपवास आत्मसंयम, श्रद्धा और आत्मशुद्धि का प्रतीक है। मान्यता है कि खरना के दिन व्रती की भक्ति से प्रसन्न होकर सूर्य देव और छठी मैया उनके परिवार को सुख, समृद्धि और आरोग्य का आशीर्वाद देते हैं।
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खरना 2025 का शुभ मुहूर्त - फोटो : Amar Ujala
खरना 2025 का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2025 में खरना का दिन 26 अक्तूबर को पड़ेगा। इस दिन सूर्योदय सुबह 6 बजकर 29 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 41 मिनट पर। खरना पूजा और प्रसाद अर्पण शाम 5:41 के बाद कर सकते हैं। इस समय पूजा करने से व्रतियों को सूर्य देव और छठी मैया का अधिकतम आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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खरना की विधि और रस्में - फोटो : adobe stock
खरना की विधि और रस्में
शाम के समय व्रती स्नान कर पूजा की तैयारी करते हैं। मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से गुड़ की खीर और रोटी बनाई जाती है। इस प्रसाद को पीतल या कांसे के बर्तनों में तैयार किया जाता है, ताकि शुद्धता बनी रहे। खीर, गुड़, दूध और चावल से मिलकर बनती है, जो सात्विकता और पवित्रता का प्रतीक मानी जाती है।
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खरना की विधि और रस्में - फोटो : Amar Ujala
पहले यह प्रसाद छठी मैया और सूर्य देव को अर्पित किया जाता है। इसके बाद व्रती और परिवारजन इस प्रसाद को ग्रहण करते हैं। इस प्रसाद को खाने के बाद व्रती 36 घंटे का निर्जला व्रत आरंभ करते हैं, जो अगले दिन संध्या अर्घ्य और चौथे दिन उदयमान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद समाप्त होता है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

 

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