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Chhath puja 2023: छठ पर्व पर कमर तक पानी में खड़े होकर दिया जाता है सूर्य देव को अर्घ्य, जानें इसका कारण

Sat, 18 Nov 2023 12:28 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Chhath Puja 2023 - फोटो : Amar Ujala
Chhath Puja 2023 Vidhi Surya Arghya time why standing in water till waist: लोकास्था का महापर्व छठ शुरू हो चुका है दिवाली के समाप्त होते ही अब लोगों ने छठ की तैयारी शुरू कर दी है। आज छठ का दूसरा दिन है। यह पर्व चार दिनों चलता है। 19 नवंबर को सूर्य को पहला अर्घ्य दिया जाएगा और अंत में 20 नवंबर की सुबह सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही यह पर्व समाप्त हो जाएगा। इस पर्व में सूर्य और छठी मैया की उपासना का विशेष महत्व होता है। नहाय खाय के दौरान व्रती अपने छठ व्रत की सफलता की कामना करते हैं और चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व में तीसरे दिन कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। लेकिन इस व्रत में व्रती कमर तक पानी में क्यों खड़े होते हैं। आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे का कारण।  
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Chhath puja 2023 - फोटो : अमर उजाला।
इसलिए पानी में खड़े होकर दिया जाता है अर्घ्य
छठ पूजा पर कमर तक पानी में खड़े होकर ही अर्घ्य दिया जाता है। इसके पीछे के कई कारण बताए जाते हैं। आइए जानते हैं उन कारणों को। 
  • ऐसा माना जाता है कि कार्तिक मास के दौरान श्री हरि जल में ही निवास करते हैं और सूर्य ग्रहों के देवता माने गए हैं
  • इस के अनुसार नदी या तालाब में कमर तक पानी में खड़े होकर अर्घ्य देने से भगवान विष्णु और सूर्य दोनों की ही पूजा एक साथ हो जाती है। 
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Chhath puja 2023 - फोटो : अमर उजाला।
  • इसके अतिरिक्त एक अन्य कारण यह भी है कि किसी भी पवित्र नदी में प्रवेश किया जाए तो सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और शुभ फल प्राप्त होते हैं।  
  • साथ ही एक मान्यता यह भी ही कि सूर्य को हम जो जल अर्पित करते हैं उसके छीटें पैरों पर न छुए।

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Chhath puja 2023 - फोटो : amar ujala
  • इस पर्व में विशेष रूप से छठी मैया की पूजा की जाती है। 
  • शास्त्रों के मुताबिक छठी माता भगवान सूर्य की मानस बहन हैं और उनकी पूजा करने से सूर्यदेव को प्रसन्न किया जा सकता है।  
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Chhath puja 2023 - फोटो : chhath puja in varanasi
क्या है छठ की पौराणिक मान्यता?
मान्यताओं के अनुसार, छठ पर्व का आरंभ महाभारत काल के समय में माना जाता है। कर्ण का जन्म सूर्य देव के द्वारा दिए गए वरदान के कारण कुंती के गर्भ से हुआ था। इसी कारण कर्ण सूर्यपुत्र कहलाते हैं। सूर्यनारायण की कृपा से ही इनको कवच व कुंडल प्राप्त हुए थे।  सूर्यदेव के तेज और कृपा से ही कर्ण महान योद्धा बने। धार्मिक मान्यता के अनुसार छठ पर्व की शुरुआत सबसे पहले सूर्यपुत्र कर्ण ने ही सूर्य की पूजा करके की थी। कर्ण प्रतिदिन घंटों कमर तक पानी में खड़े रहकर सूर्य पूजा करते थे और उनको अर्घ्य देते थे। आज भी छठ में अर्घ्य दान की यही पद्धति प्रचलित है। 
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