कार्तिक मास की शुक्ल चतुर्थी को छठ महापर्व मनाया जाता है। नहाय खाय के साथ छठ पूजा शुरू होती है जोकि अगले चार दोनों तक चलती है, इसमें भगवान सूर्य की छोटी बहन छठ मैय्या की उपासना की जाती है। इनके बारे में मान्यता है कि यह बड़ी ही दुलाली होती है और छोटी-छोटी बातों पर नाराज हो जाती हैं। इसलिए छठ पूजा के दौरान कई बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए।
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छठी मैय्या का प्रसाद बनाते समय पूरी पवित्रता का ध्यान रखें। हाथ पैर धोकर प्रसाद तैयार करें। इस दौरान कभी भी मांसाहार का सेवन नहीं करना चाहिए।
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अर्ग पर चढ़ाए जाने वाले प्रसाद को तैयार करने वाले को तब तक कुछ नहीं खाना चाहिए जब तक की प्रसाद तैयार न हो जाए।
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chhath puja in Uttarakhand
- फोटो : AmarUjala
छठ मैय्या के प्रसाद को पैर नहीं लगाना चाहिए और सूर्य को अर्घ्य देते समय चांदी, स्टील, शीशा व प्लास्टिक के बने बर्तनों से अर्घ्य नहीं देना चाहिए।
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छठी मैय्या की मनौती को नहीं भूलना चाहिए। जो मनौती हो उसे समय पर पूरा कर लेना चाहिए।
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- फोटो : AmarUjala
छठ का प्रसाद जहां बन रहा हो वहां भोजन नहीं करना चाहिए। इससे पूजा अशुद्ध माना जाता है।