जब भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं, तब संसार के संचालन की जिम्मेदारी भगवान शिव संभालते हैं।
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चातुर्मास का महत्व
हिंदू धर्म में चातुर्मास का समय विशेष रूप से पवित्र और आध्यात्मिक उन्नति के लिए उपयुक्त माना जाता है। यह चार महीने आत्मचिंतन, तपस्या, और आत्म-संयम के होते हैं। जब भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं, तब संसार के संचालन की जिम्मेदारी भगवान शिव संभालते हैं। ऐसे में यह समय सिर्फ बाहरी कर्मकांडों का नहीं, बल्कि आंतरिक जागरण और स्वयं को सुधारने का भी है।
इस अवधि में व्यक्ति को अपनी दिनचर्या को सात्विक बनाने का प्रयास करना चाहिए। रामायण, श्रीमद्भागवत गीता, विष्णु पुराण और अन्य धर्मग्रंथों का नियमित पाठ न सिर्फ ज्ञान देता है, बल्कि मन को शुद्ध और एकाग्र भी करता है। साथ ही, सुबह-संध्या का समय ध्यान, जप और शिव या विष्णु की पूजा के लिए समर्पित करें। यह साधना काल है, जिसमें जितना अधिक आप अपने भीतर उतरेंगे, उतनी ही गहराई से शांति और संतुलन अनुभव करेंगे।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।