चैत्र नवरात्रि व्रत नियम
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नवरात्रि व्रत के प्रकार
सप्तरात्र व्रत : यह व्रत प्रतिपदा से सप्तमी तक रखा जाता है। इस प्रकार से व्रत करने से संपूर्ण फल की प्राप्ति होती है।
एकभुक्त व्रत : जो लोग पूर्ण व्रत नहीं कर सकते हैं वे सिर्फ पंचमी को एकभुक्त व्रत कर सकते हैं।
नक्तव्रत: षष्ठी को रात्रि भोजन के साथ व्रत कीय जा सकता है।
अयानित व्रत : सप्तमी तिथि को अयानित व्रत किया जा सकता है। इसमे व्यक्ति को बिना मांगे जो मिले उसका व्रत में सेवन करना चाहिए।
त्रिरात्र व्रत: जो सभी व्रत नहीं कर पाते हैं वे सप्तमी, अष्टमी और नवमी को व्रत कर सकते हैं। इसे त्रिरात्र व्रत कहा जाता है।
युग्मरात्र व्रत: जो लोग प्रतिपदा और अष्टमी का व्रत करते हैं उसे युग्मरात्र व्रत कहते हैं।
एकरात्र व्रत: जो भक्त प्रतिपदा और नवमी तिथि व्रत करते हैं वह एकरात्र व्रत कहलाता है।